बीस सालों के प्यार और विश्वास ने दोनों परिवारों को इतना
करीब कर दिया था कि मोहल्ले में आये नए लोग ये जान ही नहीं पाते थे की दोनों
परिवार बस एक दुसरे के पडोसी हैं न कि रिश्तेदार | एक परिवार जिसमे श्याम नाम का लड़का था और | दूसरा परिवार
जिसमे तीन लड़के और दो लड़कियां थीं |
दुसरे परिवार
के दोनों बड़े लडकों और लड़कियों की शादी हो चुकी थे बस सबसे छोटा लड़का बचा था जो
अभी भी पढ़ रहा था |छोटी लड़की की
शादी हुए करीब एक साल होने वाले थे जबकि बीच वाले लड़के मोहन की शादी को अभी छ:
महीने हुए थे | छोटी लड़की की
शादी एक अच्छे घर में हुयी थी जो कि अपने पुरे परिवार के साथ देल्ही में रह रही थी
उनके परिवार में पति, सास-ससुर के
अलावा एक छोटी ननद राधिका थी जोकि अभी पढाई कर रही थी | श्याम और मोहन जो की श्याम से थोडा सा उम्र में बड़ा था
के बीच में इतनी गहरी दोस्ती थी कि घर वालों को भी उनसे मीठी सी जलन होती थी | दोनों ने कभी
एक दुसरे से कोई बात नहीं छिपयी थी,
हालांकि श्याम
हमेशा मोहन को भैया ही कह कर बुलाता था |
श्याम पोस्ट
ग्रेजुएशन के बाद तैयारी कर रहा था जबकि राधिका अभी अपने ग्रेजुएशन में थी |
मोहन के विवाह के कुछ ही दिनों के बाद की बात है जब श्याम
भी दिल्ली में ही अपना पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहा था, एक दिन रात करीब दस बजे उसके मोबाइल पर एक व्हाट्सएप्प पर
मैसेज आया | मैसेज एक अनजान
नंबर से आया था जिसके जवाब में श्याम ने पूछा कौन है, उधर से जवाब
आया पहचानिए ! थोड़ी देर तक सोचने के बाद श्याम ने रिप्लाई किया राधिका जी ? राधिका ने पूछा
कैसे पहचाना ? श्याम ने कहा
प्रोफाइल की फोटो देख कर और साथ ही में ये दिल्ली का नंबर है इस लिए वाइल्ड गेस
किया | बस इतना ही था
पहला चैट उसके बाद कुछ दिनों के बाद थोड़ी और बात हुई फिर धीरे-धीरे बातें बढ़ने
लगीं, एक ही शहर में
रहने के बावजूद दोनों की कभी मुलाकात ना हुई,
ऐसे ही नहीं
कहते हैं की जबतक कोई चीज आसानी से मिलती है तब तक उसका कोई मोल नहीं होता | इधर कुछ समय के
बाद ही श्याम अपना पोस्ट ग्रेजुएशन समाप्त कर दुसरे शहर चला गया तैयारी करने के
लिए | वह एक कोचिंग
में एडमिशन ले कर पढने लगा, पर बातें अभी
भी होती थीं दोनों के बीच में |
मोहन की छोटी
बहन यानी की राधिका की भाभी के शादी का सालगिरह भी आने वाला था, श्याम को भी
बुलाया था शुरुआत में तो श्याम ने मना कर दिया पर बार-बार बुलाने पर एक बहाना
बनाया की जिस दिन सालगिरह है उसी दिन उसकी परीक्षा है, सबूत के तौर पर
एक एडमिट कार्ड बना व्हाट्सएप्प पर भेज दिया जिस से की सबको ये विश्वास हो गया की
वो नहीं जा रहा है | इधर श्याम की
परीक्षा तो थी पर जिस दिन सालगिरह था उस दिन नहीं बल्कि उसके एक दिन पहले, तो उसने अपना
ट्रेन का रिजर्वेशन भी करा लिया ये सोच कर कि सबको सरप्राइज देगा | हांलाकि उसके
बाद उसे अपने आप को बहुत ही रोकना पड़ रहा था ये राज़, राज़ ही रखने के लिए,
पर फिर भी उसने
किसी तरह खुद को रोक लिया | धीरे-धीरे
एक-एक दिन कटते-कटते वो दिन भी आ गया जिस दिन उसकी परीक्षा थी, उसने ये सोचा
था की परीक्षा देकर वही से बाहर ही बाहर रेलवे स्टेशन के लिए निकल जायेगा, परन्तु परीक्षा
देकर निकलने के बाद जैसे ही वो ऑटो में बैठ कर निकला सबसे पहले तो ऑटो ख़राब हो गया, फिर जैसे-तैसे
कर के वह से निकला तो ट्रैफिक में फंस गया जिस से उसको लगा की वह वक्त पर स्टेशन
नहीं पहुँच पायेगा, मन ही मन वो यह
भी सोच रहा था की चलो अच्छा है की मैंने किसी को बताया नहीं कि मै आ रहा हूँ अगर
ट्रेन छूट भी गयी तो कोई बात नहीं,
पर होनी को कौन
टाल सकता था जब वह स्टेशन पंहुचा तो उस समय ट्रेन रवाना होने के लिए तैयार थी और
सिग्नल भी हो चुका था, दौड़ते हुए वो
प्लेटफोर्म पर पंहुचा और जैसे ही अपने रिज़र्व डब्बे में चढ़ा ट्रेन चल दी | सबको सरप्राइज
देकर उनका हैरान चेहरा कैसा होगा ये सोचते सोचते उसको कब नींद आ गयी पता ही नहीं
चला |
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