Sunday, April 19, 2015

व्हाट्सएप्प - भाग-2

गतांक से आगे ....

अगले दिन सुबह करीब ६ बजे वो अपने दीदी के घर पहुच चुका था, उधर राधिका भी उसी रात को अपने कालेज से आई थी तो थकी-मांदी अभी तक सो रही थी | श्याम घर के बाकी लोगो से बैठा बातें कर रहा था जब राधिका की मम्मी ने उसको जगाया राधिका ने कुनमुनाते हुए आँखे खोली और पूछी क्या बात है इतनी जल्दी क्यों उठाया? जल्दी उठ मेहमान आयें हैं और तू अभी तक सो रही है उठ जल्दी | उधर श्याम बैठा अपने दीदी और जीजा जी से बातें कर रहा था, उसकी आवाज जब राधिका के कानो में पहुंची तो उसे यकीन नहीं हुआ और वह जल्दी से उठ कर बैठक वाले कमरे में आई जहाँ श्याम बैठा बातें कर  रहा था | जैसे ही उसने श्याम को बैठा हुआ देखा शर्मा कर अन्दर भाग गयी
राधिका व्हाट्सएप्प पर  " क्या ये आप हैं? "
श्याम  " हाँ मुझे मैसेज किया है तो मै ही होऊंगा और कौन होगा ? "
राधिका  " नहीं-नहीं क्या आप इस समय दिल्ली में और वो भी मेरे घर के बैठक में? "
श्याम  " आपको क्या लगता है? "
राधिका  " हैं तो आप ही, पर आप की परीक्षा? "
श्याम  " आप से मिलने के लिए छोड दिया "
राधिका गुस्से में  " क्या जरुरत थी छोड़ने की? "
श्याम  "  आपसे मिलना जो था  "
राधिका  " पर मै नहीं चाहती थी कि आप अपनी परीक्षा छोड़ कर आयें  "
श्याम  " ओके, मै वापस चला जाता हु अभी भी जा कर परीक्षा दे सकता हूँ "
राधिका  " ठीक है जाइये और परीक्षा के बाद आईयेगा "
श्याम  " अरे मेरी परीक्षा कल ही हो गयी "
राधिका  " झूठ "
श्याम  " झूठ वो था कि मेरी परीक्षा आज है "
राधिका  " पर एडमिट कार्ड? "
श्याम  " कंप्यूटर पर की गयी कारस्तानी थी "
राधिका  " सच्ची? "
श्याम  " जी हाँ "
राधिका  " वाओ, क्या बात है, पर आपने ऐसा किया क्यों? झूठ क्यों बोला ?बताया क्यों नहीं? "
श्याम  " आपको सरप्राइज देने के लिए वरना आप के इस सुन्दर मुखड़े के दर्शन कैसे पाता मै? "
राधिका  " अच्छा फ्लर्टिंग?पर मुझे बहुत पसंद आया आपका आईडिया "
श्याम  " सच्ची? "
राधिका  " मुझे सरप्राइज बहुत पसंद है  "
श्याम  " देना या पाना? "
राधिका  " दोनों "
श्याम  " तो मुझे कब दे रहीं हैं सरप्राइज  "
राधिका  " सरप्राइज बता कर दिया जाता है क्या? जब दूंगी तो आपका चेहरा देखने लायक होगा  "
श्याम  " मै उसका इंतजार करूँगा " 


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