गतांक से आगे ....
फिर दोनों वहां से निकल कर चल दिए, घर पहुचने के बाद दोनों अपने अपने काम में व्यस्त हो गए और फिर आपस में बात करने का समय ही नहीं मिला, उधर मोहन ये जानने के लिए बेचैन हो रहा था की क्या बात है आखिर वह हो क्या रहा था? पर उसको मौका नहीं मिल पा रहा था नहीं ही राधिका से बात करने का नहीं श्याम से | आखिर-कार सालगिरह का समारोह समाप्त हुआ जिसमे कि कुछ बहुत ही ख़ास लोग ही शामिल हुए जिसमे कि मोहन और श्याम का परिवार के साथ-साथ राधिका का परिवार और कुछ और नजदीकी लोग थे |समारोह के बाद थक कर मोहन और श्याम छत पर जा कर बैठ गए, अभी वो बैठे ही थे कि किसी ने श्याम को आवाज देकर बुला लिया और वो चला गया, जबकि मोहन वही बैठा रह गया उसको पता था कि जिस लिए भी उसको बुलाया गया है उस काम को कर के श्याम ऊपर ही आएगा | थोड़ी देर के ही बाद राधिका दो कप में चाय लेकर आई और एक कप मोहन को दिया और दूसरा श्याम के लिए वहीँ रख दिया और खुद भी वही बैठ गयी
फिर दोनों वहां से निकल कर चल दिए, घर पहुचने के बाद दोनों अपने अपने काम में व्यस्त हो गए और फिर आपस में बात करने का समय ही नहीं मिला, उधर मोहन ये जानने के लिए बेचैन हो रहा था की क्या बात है आखिर वह हो क्या रहा था? पर उसको मौका नहीं मिल पा रहा था नहीं ही राधिका से बात करने का नहीं श्याम से | आखिर-कार सालगिरह का समारोह समाप्त हुआ जिसमे कि कुछ बहुत ही ख़ास लोग ही शामिल हुए जिसमे कि मोहन और श्याम का परिवार के साथ-साथ राधिका का परिवार और कुछ और नजदीकी लोग थे |समारोह के बाद थक कर मोहन और श्याम छत पर जा कर बैठ गए, अभी वो बैठे ही थे कि किसी ने श्याम को आवाज देकर बुला लिया और वो चला गया, जबकि मोहन वही बैठा रह गया उसको पता था कि जिस लिए भी उसको बुलाया गया है उस काम को कर के श्याम ऊपर ही आएगा | थोड़ी देर के ही बाद राधिका दो कप में चाय लेकर आई और एक कप मोहन को दिया और दूसरा श्याम के लिए वहीँ रख दिया और खुद भी वही बैठ गयी
मोहन " राधिका एक बात बताओ? "
राधिका " पूछिये? "
मोहन " जो मैंने फ़ोन पर सुना वो क्या था? "
राधिका " क्या मतलब? क्या सुना आपने
फ़ोन पर? "
मोहन " याद करो, कुछ आखिरी प्यार-व्यार की बात हो रही थी "
राधिका " वो कुछ नहीं था, बस एक मजाक था
जो कि आपको सुनाने के लिए किया गया था "
मोहन " अच्छा ये बात है? "
राधिका " जी "
मोहन " फिर श्याम ने क्यों कहा कि आप और वो एक
दुसरे से प्यार करते हैं?
"
राधिका " उन्होंने आपको सब बता दिया? "
मोहन " हाँ,
वो मुझसे कुछ
नहीं छिपता है "
राधिका " जब आप सब जानते ही हैं तो मुझसे क्यों
पूछ रहे हैं "
मोहन " बस आपके मुह से सुनना चाहता हूँ, मुझे लगा वो
झूठ न बोल रहा हो "
राधिका " नहीं-नहीं वो झूठ नहीं बोल रहे थे, ये सब सच है, मै आपको पूरी
बात बताती हूँ "
उसके बाद
राधिका ने मोहन को सारी बात बता दी शुरु के लेकर सुबह तक की
मोहन " श्याम ने कुछ नहीं बताया था उसको मौका
ही नहीं मिला बताने का पर चलो तुमने तो बता दिया, हाँ पहला मौका मिलते ही वो मुझे जरुर बताता "
राधिका " आप बहुत बदमाश हैं "
उसके बाद राधिका शर्मा कर भाग गयी, और मोहन वही
खड़ा खड़ा हँसता रहा, तभी वहां श्याम
वापस आ गया, मोहन ने सोचा
कि एक बार इस से भी पूछता हूँ |
मोहन " तुम लिखते हो ना? "
श्याम " हाँ थोडा बहुत, क्यों? "
मोहन " मेरे पास एक कहानी का आईडिया है, तुम उसपर कहानी
लिखो "
श्याम " क्या है कहानी बताइए ? "
मोहन ने फिर
राधिका और श्याम की बीच की घटनाओं को कहानी के रूप में सुना दिया, कहानी सुन कर
श्याम सोच में पड़ गया,
श्याम " आपको सब पता चल गया? "
मोहन " क्या ? "
श्याम " मतलब आपको कुछ नहीं पता है? "
मोहन " क्या बात कर रहे हो क्या पता चल गया और
क्या नहीं पता है खुल कर बताओ?
"
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