आख़िरकार राघव ने
मोहित को इस यात्रा पर आने के लिए मना ही लिया, हाँलाकि उसको बहुत मशक्कत करनी पड़ी पर अंत में वह सफल
हो ही गया, मोहित की पत्नी
रूपा का भी इस सफलता में बहुत बड़ा हाँथ था | राघव और मोहित दोनों ही बचपन के दोस्त, ऐसे दोस्त की
औरों को देखकर जलन होने लगती थी कि उनका अपने सगे भाई के साथ ऐसा प्यार और विश्वाश
नहीं है जैसा की इन दो दोस्तों में | पर समय ने दोनों को अलग कर दिया दोनों अलग-अलग जगहों
पर पढने चले गए और फिर अलग-अलग जगहों पर नौकरी भी करने लगे, परन्तु उनके बीच
बातों का सिलसिला चलता रहा जब तक कि मोहित की जिंदगी में रूपा का आगमन नहीं हुआ | रूपा के आने के
बाद राघव और मोहित के बीच बातें कम होने लगीं, क्युकि दिन भर काम करने के बाद शाम को जो थोडा-बहुत
समय मिलता था उस समय को मोहित रूपा से बात करने में ज्यादा बिताता था | कुछ दिनों के बाद
आखिर मोहित ने राघव को रूपा के बारे में बता दिया और बोला कि मेरी उस से शादी करवा
दे, पर राघव ने मना
कर दिया इस बात पर मोहित राघव से ऐसा नाराज हुआ कि अगले तीन सालों तक उस मिलना तो
दूर से बात तक नहीं की, इस बीच राघव ने
बहुत कोशिश की मोहित से बात करने का लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, मोहित राघव का
फ़ोन तक नहीं उठाता था, धीरे-धीरे राघव ने भी फ़ोन करना बंद कर दिया, पर अचानक कुछ ही
दिन पहले उसने रूपा को फ़ोन किया और उसे इस यात्रा पर आने के लिए मनाने लगा और साथ
ही साथ मोहित को भी मनाने का दबाव डालने लगा |आख़िरकार रूपा मान गयी और मोहित को भी मनाने का प्रयास
करने लगी पर मोहित किसी भी तरह मानने को तैयार नहीं हो रहा था तब रूपा ने नाराज
होने का आखिरी दांव खेला, और ये दांव चल गया पर साथ में मोहित ने ये भी शर्त भी
रख दी की ज्यादा बात नहीं करेगा और, जितनी जल्दी हो सकेगा उतनी जल्दी वापस आ जायेगा |
सर्दियाँ शुरू हो
चुकी थी, पहाड़ों पर पहली
बर्फ भी गिरने ही वाली थी, जब तेज चलती हवा के बीच हलकी गुनगुनी धुप निकल कर
शरीर से टकराती थी तो ऐसा लगता था कि मानो जन्नत में आ गए हों, ऐसे में राघव ने
अपनी कुछ दिनों की छोटी यात्रा की योजना बना लिया था | यात्रा शुरू होने
वाले दिन की सुबह तक मोहित और रूपा को कुछ नहीं पता था कि यात्रा का क्या इंतजाम
है और कैसे है, राघव ने उन्हें
कुछ नहीं बताया था बस उन्हें एक जगह बुला लिया था जहाँ वो दोनों वह इंतज़ार कर रहे थे, थोड़ी ही देर के
बाद अचानक एक बड़ी सी गाडी आकर उनके सामने रुकी और उसमे से राघव उतरा और मुस्कुराते
हुए मोहित की तरफ बढ़ा और उसे अपने गले से लगा लिया पर मोहित ने कोई जवाब नहीं दिया, रूपा ने उस से
पूछा की क्या योजना है जबकि मोहित चुप ही रहा, राघव ने उचटती सी नजर मोहित पर डाली और गाडी से टेक
लेकर उन्हें अपनी योजना समझाने लगा
"आज सुबह यहाँ से निकल कर शाम तक कुल्लू पहुच कर
रात भर आराम करेंगे फिर कल सुबह से कुल्लू और आस पास के जगह घूमेंगे, इधर एक-दो दिन
में ही बर्फ़बारी होने वाली है तो वहां रुक कर पहाड़ों की पहली बर्फ़बारी का भी आनंद
लेंगे फिर वहां से वापस |"
रूपा "वाह! क्या योजना है इस बार तो घूमने में
बहुत मजा आएगा "
मोहित थोड़ा चौंककर राघव की तरफ देखा और बोला "
ये तो तुम्हारा बचपन का ख़्वाब था ना ?"
राघव मुस्कुराते हुए " हाँ "
रूपा राघव की तरफ देखते हुए बोली " कैसा ख़्वाब ?"
मोहित ने उसको बताया " ये इसका बचपन का ख़्वाब था
कि मरने से पहले एक बार मेरे साथ गाड़ी ने यहाँ से किसी ऐसी जगह पर जाए जहाँ बर्फ
पड़ने वाली हो, पर ये सब इतनी
जल्दी क्यों? मतलब कुछ सालों
के बाद भी तो जा सकते थे "
रूपा और मोहित लगातार राघव की तरफ देखे जा रहे थे
जबकि राघव अपने मोबाइल में कुछ करता हुआ बिना उनकी तरफ देखे बोला " जिंदगी का
क्या भरोसा आज है कल नहीं सो कल जाने से अच्छा है आज ही चलते हैं खैर छोडो ये सब
बातें और चलो निकलतें हैं वरना देर हो जायेगी "
कुल्लू में रुके
हुए उन्हें दो दिन हो चुके थे, जितनी मस्ती कर सकते थे उतनी मस्ती की, जितने फोटो ले
सकते थे उतने फोटो ले लिए, जिसके लिए आये थे वो भी हो चुका, अर्थात बर्फ़बारी
भी हो चुकी थी और आज की शाम उन तीनों की कुल्लू में आखिरी शाम थी | राघव ने मोहित और
रूपा को एक शानदार रात्रि-भोज कराया था और, वापस अपने होटल के रूम में आ गए थे, राघव सोने से
पहले कोई दवा खा रहा था कि अचानक से रूपा उसके कमरे में अन्दर आ गयी और उसने राघव
को दवा खाते देख लिया जबकि
राघव ने दवा को अपने पीछे छुपाते हुए रूपा से पूछा
"क्या बात है भाभी कोई समस्या है क्या ?"
अगले भाग में जारी....
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