Sunday, June 14, 2015

व्हाट्सएप्प - भाग-10

गतांक से आगे ....

श्याम समझ तो चुका था कि मोहन को सब पता चल गया है और वो इस मौके को कैसे भुनाए इस पर विचार करने लगा, थोड़ी देर सोचने के बाद बोला
श्याम  " बाकी सब तो ठीक है, पर इस कहानी का अंत क्या होगा "
मोहन मुस्कुराते हुए  " ह्म्म्म ये तो तुम्हे सोचना है  "
श्याम  " हाँ पर कोई आईडिया तो दीजिये? "
मोहन  " अंत में शादी करा दो "
श्याम  " पर घर वालो से बात कौन करेगा "
मोहन  " हीरो का भाई "
श्याम  " पर ये रोमांचक नहीं होगा "
मोहन  " तुम्हारे पास कोई आईडिया है तो बताओ? "
श्याम  " शादी तो करा दें दोनों की पर सरप्राइज के साथ "
मोहन  " मतलब? "
श्याम  " या तो दोनों को सरप्राइज दिया जाये या फिर किसी एक को "
मोहन  " दोनों को देना मुश्किल है, किसी एक को ही देना होगा, पर किसको? "
श्याम  " राधिका को, उसको सरप्राइज बहुत पसंद है "
मोहन हँसते हुए  " राधिका ? वो कहा से आ गयी इस कहानी में? "
श्याम  " बस ! रहने दीजिये आपको भी पता है की कहाँ से आई और मुझे भी "
मोहन हँसते हुए  " क्या पता है? "
श्याम  " मेरी मदद करेंगे या नहीं ? "
मोहन गंभीर होकर  " क्यों नहीं? पर मुझे पूरी बात शुरू से बताओ और ये भी किसको-किसको पता है? " 
श्याम  " आपके अलांवा किसी को नहीं "  और फिर उसने पूरी बात बता दी
मोहन  " तो अब करना क्या है? चाचा जी तो तुम्हारे लिए रिश्ता ढूढ रहे हैं और उधर राधिका के पिता जी भी उसके लिए लड़के देख रहे हैं "
श्याम  " बस दोनों को याद दिलाना है, एक दुसरे की जरुरत वो दोनों ही मिल कर पूरी कर सकते हैं "
मोहन  " पर उनको याद कौन दिलाएगा? "
श्याम  " पापा को आप याद दिलाइये और उनके लिए मै किसी और को पकड़ता हूँ "
मोहन  " किसको ? "
श्याम  " राधिका से बात करता हूँ और दीदी से भी "

मोहन  " ठीक है "

सालगिरह के दिन से करीब चार महीने के बाद गर्मी का महिना था ऐसा लगता था कि सूर्य देव भी राधिका के गम में शामिल होने के लिए अपनी सम्पूर्ण ऊष्मा के साथ खुद पधार चुके हैं, आज राधिका की सगाई थी, कोई अनजान सा लड़का था जिसे उसके पिता जी ने पसंद किया था, वो तो यहाँ तक नाराज थे कि राधिका को उस लड़के का फोटो भी दिखाना सही नहीं समझा था | उधर राधिका भी अपने घर वालों से इतना नाराज थी कि उसने फोटो देखने की जिद भी नहीं की और अपनी भाभी को जब वो सबसे छुपाकर फोटो दिखने लायीं तो बोल दिया की अगर पिताजी किसी अंधे लूले लंगड़े से भी मेरी शादी कराएँगे तो भी मै तैयार हूँ | उस पंच सितारा होटल के एक कमरे में राधिका अपने भाभी और सहेलियों के साथ बैठी तैयार हो रही थी जबकि वो लड़का और उसका परिवार अभी आने वाले थे, इसी पंच सितारा होटल में आज उनकी सगाई हो रही थी जो एक दुसरे से अनजान थे यहाँ तक कि कभी एक दुसरे को देखा भी नहीं था | राधिका अभी अपने सर का पल्लू ठीक कर रही थी तब तक उसकी एक सहेली ने बोला लड़के वाले आ गए और लड़का तो सच में लंगड़ा है और वो हंसाने लगी, राधिका ने अचानक चौक कर ऊपर देखा तो उसे किसी की एक झलक उस शीशे में दिखाई दी जो वहां लगाया गया था और जिसके सामने बैठ कर राधिका तैयार हो रही थी, राधिका ने धड़कते हुए दिल से अपना फ़ोन उठाया और तुरंत श्याम को मैसेज किया 

अगले भाग में जारी ....

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