Friday, June 12, 2015

रावण भाई

हर शुक्रवार की तरह आज भी स्वाति अपनी दादी के साथ घर पर अपनी माँ और पिता जी के आने का इंतज़ार कर रही थी | दादी ने उसे बचपन से ही रामायण और महाभारत की कहानियां सुनाती थीं जिस वजह से इतनी छोटी सी ही उम्र में उसे रामायण और महाभारत की लगभग हर कहानी और और पात्र याद थे | उसे नहीं पता की माँ और पिता जी हर शुक्रवार को कहाँ जाते हैं, पर दादी कहतीं हैं कि वो दोनों उसके लिए एक भाई की तलाश में जाते है, जबसे उसके माँ और पिता जी ने जाना शुरू किया है तब से स्वाति अपनी दादी के पास रहती है और उनके आने का इंतज़ार करती है, हर शुक्रवार की शाम जब माँ और पिता जी घर आतें हैं तो वो उनसे अपने भाई के बारे में पूछ-पूछ कर हैरान करती है, कई बार तो उसकी माँ ने झुंझला कर उसको डांट भी दिया है, हर डांट के बाद वो रोते हुए अपने दादी के पास चली जाती है और रोते रोते उनके पास ही सो जाती है, पर अगले दिन सब भूल कर फिर से वही बाल-सुलभ चंचलता उसके अन्दर आ जाती है, शायद इसीलिए कहतें हैं कि बालमन की गहराइयों को कोई नहीं समझ सकता है |

शाम को जब स्वाति के पिता जी और माँ आये तो काफी खुश लग रहे थे, आख़िरकार बहुत ही मन्नत, पूजा-पाठ और दवाओं के बाद स्वाति की माँ ७ साल बाद एक बार फिर उम्मीद से जो थी | आज उसके पिता जी ने घर आते ही उसको अपनी गोद में उठा लिया, जबकि माँ वही खड़ी-खड़ी मुस्कुराती रही | दादी ने उनसे पूछा " क्या बात है राहुल बेटा, बहुत खुश लग रहा है, क्या कहा डॉक्टर ने ? “तो स्वाति की माँ शर्मा कर घर के अन्दर चली गयीं | स्वाति के पिता जी ने खुशी से चहकते हुए कहा " हाँ माँ, आज मै बहुत खुश हूँ, बहुत ही ज्यादा " दादी ने पूछा "अरे कुछ बताएगा भी? " राहुल ने स्वाति का माथा चूम कर कहा " अब तेरा भाई जल्दी ही आने वाला है बस कुछ महीने का इंतज़ार और " दादी ख़ुशी के मारे अपने बिस्तर से उठ कर खड़ी हो गयीं " क्या सच? सच में ? क्या कहा डॉक्टर ने ? " उन्होंने पूछा " माँ डॉक्टर ने कहा है की स्वाति की माँ उम्मीद से हैं, पहला महीना है " पिता जी ने कहा, इन सब बातों के बीच में स्वाति कब उनके हांथो से उतर कर दादी के बिस्तर पर जा कर बैठ गयी ना दादी को पता चला ना ही उसके पिता जी को | स्वाति को दुबारा अपनी गोद में लेते हुए उसके पिता जी ने उस से पूछा " अच्छा बता तो, तुझे कैसा भाई चाहिए?

स्वाति  उनकी गोद से उतर कर दुबारा बिस्तर पर बैठ गयी और सोचने लगी | उसे अपना भाई मिलने की ख़ुशी तो थी पर, उसने ये कभी नहीं सोचा था कि उसे कैसा भाई चाहिए ? हर शुक्रवार को पिता जी और माँ के आने के बाद बस भाई कहाँ है ? कब आएगा ? कैसा है ? इत्यादि सवाल तो वही करती थी पर ये सवाल कि कैसा भाई चाहिए ? बहुत ही अलग और कठिन था " उम्म्म्म, सोनू के जैसा " बहुत सोच कर स्वाति ने बगल के शर्मा जी के ६ साल के बेटे का नाम लिया " नहीं, नहीं, सोनू मुझे चिढ़ाता है, उसके जैसा नहीं " कुछ और सोच कर उसने बोला " फिर कैसा चाहिए ? सोनू तुझे चिढ़ाता है तो तू उसके साथ क्यों खेलती है ?" उसके पिता जी ने एक और प्रश्न किया " अब मेरा भाई आ जायेगा तो नहीं खेलूंगी उस सोनू के साथ, अपने भाई के साथ खेलूंगी, और मेरा भाई उसकी तरह नहीं होना चाहिए " स्वाति सोचते-सोचते बोली, " अरे अगर वैसा नहीं चाहिए तो कैसा चाहिए ? “दादी अपने बिना दांतों के पोपले मुँह से स्वाति का माथा चूम कर बोलीं " मुझे रावण जैसा भाई चाहिए " आखिर स्वाति ने बहुत सोचने के बाद बोला |

ऐसे उत्तर की आशा नहीं थी दोनों को पिता जी का मुँह खुला का खुला रह गया, जबकि दादी ने एक पल को उसको देखा फिर उसके पिता को और फिर गुस्से में बोलीं " पगला गयी है क्या, जानती नहीं है क्या कि रावण कौन था ? तुझे राम या लक्ष्मण, भरत जैसा भाई नहीं चाहिए, लो देखो अपनी लाड़ली को, इसको रावण जैसा भाई चाहिए " फिर उन्होंने स्वाति को दो थप्पड़ भी लगा दिया " इतनी मिन्नत के बाद तो ये ख़ुशी का दिन आया है और इस कलमुहीं को रावण जैसा भाई चाहिए, तू कुछ बोलता क्यों नहीं ? “थप्पड़ों की वजह से स्वाति रोने लगी थी जबकि उसके पिता ने उसकी तरफ देखा फिर अपनी माँ की तरफ देख कर बोले " देख माँ, पहले तो उस से पूछ की रावण जैसा भाई क्यों चाहिए, और अभी ये पता नहीं कि लड़की होगी या लड़का? अरे मैं तो इस से मजाक में पूछ रहा था, तू तो गंभीर हो गयी लड़के को लेकर " फिर उन्होंने स्वाति के आंसू पोंछे और उस से प्यार से दुलार कर पूछा " बेटा तुमको पता है न कि रावण कौन था, फिर तुझे रावण जैसा भाई क्यों चाहिए ? “पिता के प्यार ने स्वाति को थोडा संभाला |


स्वाति के रोने की आवाज सुन कर उसकी माँ भी वही आ गयी थी, और उसको अपनी गोद में लेकर चुप करने का प्रयास कर रही थी, अब स्वाति रोना छोड़ कर सुबकने लगी थी, उसने सुबकते हुए बोला " हां, माँ मुझे रावण जैसा भाई चाहिए क्युकि, रावण एक ऐसा भाई था जो ये जानते हुए भी कि राम भगवान हैं, उनसे अपनी बहन के अपमान का बदला लेने के लिए युद्ध किया, उसके सगे-सम्बन्धी मारे गए,उसका राज्य ख़त्म हो गया लेकिन अपनी बहन के अपमान का बदला लेने की लिए अंत तक लड़ा | तो मुझे लगता है कि मुझे रावण जैसा ही भाई चाहिए कि अगर कोई मेरा अपमान करे तो उसका बदला ले ना कि चुप-चाप बैठा रहे, इसलिए मुझे मेरा भाई रावण की तरह चाहिए | " स्वाति के माँ, पिता जी और दादी अपनी-अपनी जगह पर स्तब्ध खड़े थे | शायद वो भी यही सोच रहे थे कि आज के इस समाज में हर लड़की का भाई रावण ही होना चाहिए, ताकि उस लड़की की तरफ कोई आँख उठा कर भी देख सके |

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