Sunday, April 26, 2015

व्हाट्सएप्प - भाग-3

गतांक से आगे ....

उसके बाद राधिका घर के कामों में व्यस्त हो गयी और श्याम अपने जीजा जी के साथ बाहर के कामो में, शाम को एक छोटी सी पार्टी हुई जिसमे केक काटा गया | उसके अगले दिन श्याम लौट कर वापस अपने शहर आ गया | वापस आने के बाद दोनों के बीच की बात-चीत का सिलसिला और बढ़ गया जिसमे की ज्यादातर सरप्राइज की ही बातें होती थी | राधिका का तो पता नहीं पर धीरे-धीरे श्याम के लिए राधिका अब आदत बन चुकी थी, अगर कुछ घंटे भी बात न करता तो उसे गुस्सा आने लगता था, राधिका अगर मजाक में भी किसी और लड़के की बातें करती तो तो नाराज हो जाता था, श्याम के लिए ये बातों का सिलसिला कब प्यार में बदल गया ना उसे पता चला और ना ही राधिका को, काफी परेशान होने के बाद श्याम ने आखिर एक दिन सोचा कि राधिका को अपनी हालत बता ही दे, पर वो अन्दर ही अन्दर डरता था कि अगर राधिका ने उससे बात करना भी बंद कर दिया तो वो कैसे रह पायेगा, इसी उधेड़बुन में कई दिन बीत गए और एक दिन...
राधिका  " क्या बात है? आज आप ठीक से मैसेज नहीं कर रहे हैं कोई प्रॉब्लम है क्या? "
श्याम  " नहीं-नहीं ऐसी कोई बात नहीं है "
राधिका  " नहीं कोई बात है बताइए क्या बात है?  "
श्याम  " कोई बात नहीं है बस मूड ठीक नहीं है  "
राधिका  " वही तो पर क्यों ठीक नहीं है?  "
श्याम  " आपको कैसे पता चला की मेरा मूड ठीक नहीं है  "
राधिका  " आपके बारे में मुझे सब पता चल जाता है  "
श्याम  " मैसेज पढ़ कर ? "
राधिका  " हाँ "
श्याम  " कैसे "
राधिका  " बस पता चल जाता है, मुझे महसूस हो जाता है "
श्याम  " अच्छा जी ये बात है, और क्या महसूस होता है? "
राधिका  " यही की आप मुझसे कुछ कहना चाहते हैं पर कह नहीं रहे हैं "
श्याम  " मैंने आपसे कब छुपाया है? जो अब छुपाऊंगा? "
राधिका  " वही तो जब कभी नहीं छुपाया तो अब क्यों छुपा रहे हैं? वैसे भी आप कई दिन से कुछ कहना चाहते हैं पर कह नहीं रहे हैं  "
श्याम  " हाँ कहना तो है "
राधिका  " तो कहिये, क्या बात है? "
श्याम  " आप नाराज़ तो नहीं होंगी ना? "
राधिका  " आज तक नाराज हुई हूँ क्या किसी बात पर? "
श्याम  " नहीं  "
राधिका  " तो फिर कहिये क्या कहना है? वैसे मुझे थोडा अनुमान तो है पर मै आपके मुह से सुनना चाहती हूँ  "
श्याम  " अगर ये बात है तो मै भी आज बोल ही देता हु मेरी भी टेंशन आज ख़त्म हो जाएगी  "
राधिका थोडा झुंझलाते हुए  " COME ON ! TELL ME NOW (चलिए बता भी दीजिये)

श्याम गहरी सांस भरते हुए  " I LOVE YOU ! (मै आपसे प्यार करता हूँ) " 

अगले भाग में जारी ....

Sunday, April 19, 2015

व्हाट्सएप्प - भाग-2

गतांक से आगे ....

अगले दिन सुबह करीब ६ बजे वो अपने दीदी के घर पहुच चुका था, उधर राधिका भी उसी रात को अपने कालेज से आई थी तो थकी-मांदी अभी तक सो रही थी | श्याम घर के बाकी लोगो से बैठा बातें कर रहा था जब राधिका की मम्मी ने उसको जगाया राधिका ने कुनमुनाते हुए आँखे खोली और पूछी क्या बात है इतनी जल्दी क्यों उठाया? जल्दी उठ मेहमान आयें हैं और तू अभी तक सो रही है उठ जल्दी | उधर श्याम बैठा अपने दीदी और जीजा जी से बातें कर रहा था, उसकी आवाज जब राधिका के कानो में पहुंची तो उसे यकीन नहीं हुआ और वह जल्दी से उठ कर बैठक वाले कमरे में आई जहाँ श्याम बैठा बातें कर  रहा था | जैसे ही उसने श्याम को बैठा हुआ देखा शर्मा कर अन्दर भाग गयी
राधिका व्हाट्सएप्प पर  " क्या ये आप हैं? "
श्याम  " हाँ मुझे मैसेज किया है तो मै ही होऊंगा और कौन होगा ? "
राधिका  " नहीं-नहीं क्या आप इस समय दिल्ली में और वो भी मेरे घर के बैठक में? "
श्याम  " आपको क्या लगता है? "
राधिका  " हैं तो आप ही, पर आप की परीक्षा? "
श्याम  " आप से मिलने के लिए छोड दिया "
राधिका गुस्से में  " क्या जरुरत थी छोड़ने की? "
श्याम  "  आपसे मिलना जो था  "
राधिका  " पर मै नहीं चाहती थी कि आप अपनी परीक्षा छोड़ कर आयें  "
श्याम  " ओके, मै वापस चला जाता हु अभी भी जा कर परीक्षा दे सकता हूँ "
राधिका  " ठीक है जाइये और परीक्षा के बाद आईयेगा "
श्याम  " अरे मेरी परीक्षा कल ही हो गयी "
राधिका  " झूठ "
श्याम  " झूठ वो था कि मेरी परीक्षा आज है "
राधिका  " पर एडमिट कार्ड? "
श्याम  " कंप्यूटर पर की गयी कारस्तानी थी "
राधिका  " सच्ची? "
श्याम  " जी हाँ "
राधिका  " वाओ, क्या बात है, पर आपने ऐसा किया क्यों? झूठ क्यों बोला ?बताया क्यों नहीं? "
श्याम  " आपको सरप्राइज देने के लिए वरना आप के इस सुन्दर मुखड़े के दर्शन कैसे पाता मै? "
राधिका  " अच्छा फ्लर्टिंग?पर मुझे बहुत पसंद आया आपका आईडिया "
श्याम  " सच्ची? "
राधिका  " मुझे सरप्राइज बहुत पसंद है  "
श्याम  " देना या पाना? "
राधिका  " दोनों "
श्याम  " तो मुझे कब दे रहीं हैं सरप्राइज  "
राधिका  " सरप्राइज बता कर दिया जाता है क्या? जब दूंगी तो आपका चेहरा देखने लायक होगा  "
श्याम  " मै उसका इंतजार करूँगा " 


Monday, April 13, 2015

व्हाट्सएप्प - भाग-1

बीस सालों के प्यार और विश्वास ने दोनों परिवारों को इतना करीब कर दिया था कि मोहल्ले में आये नए लोग ये जान ही नहीं पाते थे की दोनों परिवार बस एक दुसरे के पडोसी हैं न कि रिश्तेदार | एक परिवार जिसमे श्याम नाम का लड़का था और | दूसरा परिवार जिसमे तीन लड़के और दो लड़कियां थीं | दुसरे परिवार के दोनों बड़े लडकों और लड़कियों की शादी हो चुकी थे बस सबसे छोटा लड़का बचा था जो अभी भी पढ़ रहा था |छोटी लड़की की शादी हुए करीब एक साल होने वाले थे जबकि बीच वाले लड़के मोहन की शादी को अभी छ: महीने हुए थे | छोटी लड़की की शादी एक अच्छे घर में हुयी थी जो कि अपने पुरे परिवार के साथ देल्ही में रह रही थी उनके परिवार में पति, सास-ससुर के अलावा एक छोटी ननद राधिका थी जोकि अभी पढाई कर रही थी | श्याम और  मोहन जो की श्याम से थोडा सा उम्र में बड़ा था के बीच में इतनी गहरी दोस्ती थी कि घर वालों को भी उनसे मीठी सी जलन होती थी | दोनों ने कभी एक दुसरे से कोई बात नहीं छिपयी थी, हालांकि श्याम हमेशा मोहन को भैया ही कह कर बुलाता था | श्याम पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद तैयारी कर रहा था जबकि राधिका अभी अपने ग्रेजुएशन में थी |

मोहन के विवाह के कुछ ही दिनों के बाद की बात है जब श्याम भी दिल्ली में ही अपना पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहा था, एक दिन रात करीब दस बजे उसके मोबाइल पर एक व्हाट्सएप्प पर मैसेज आया | मैसेज एक अनजान नंबर से आया था जिसके जवाब में श्याम ने पूछा कौन है, उधर से जवाब आया पहचानिए ! थोड़ी देर तक सोचने के बाद श्याम ने रिप्लाई किया राधिका जी ? राधिका ने पूछा कैसे पहचाना ? श्याम ने कहा प्रोफाइल की फोटो देख कर और साथ ही में ये दिल्ली का नंबर है इस लिए वाइल्ड गेस किया | बस इतना ही था पहला चैट उसके बाद कुछ दिनों के बाद थोड़ी और बात हुई फिर धीरे-धीरे बातें बढ़ने लगीं, एक ही शहर में रहने के बावजूद दोनों की कभी मुलाकात ना हुई, ऐसे ही नहीं कहते हैं की जबतक कोई चीज आसानी से मिलती है तब तक उसका कोई मोल नहीं होता | इधर कुछ समय के बाद ही श्याम अपना पोस्ट ग्रेजुएशन समाप्त कर दुसरे शहर चला गया तैयारी करने के लिए | वह एक कोचिंग में एडमिशन ले कर पढने लगा, पर बातें अभी भी होती थीं दोनों के बीच में | मोहन की छोटी बहन यानी की राधिका की भाभी के शादी का सालगिरह भी आने वाला था, श्याम को भी बुलाया था शुरुआत में तो श्याम ने मना कर दिया पर बार-बार बुलाने पर एक बहाना बनाया की जिस दिन सालगिरह है उसी दिन उसकी परीक्षा है, सबूत के तौर पर एक एडमिट कार्ड बना व्हाट्सएप्प पर भेज दिया जिस से की सबको ये विश्वास हो गया की वो नहीं जा रहा है | इधर श्याम की परीक्षा तो थी पर जिस दिन सालगिरह था उस दिन नहीं बल्कि उसके एक दिन पहले, तो उसने अपना ट्रेन का रिजर्वेशन भी करा लिया ये सोच कर कि सबको सरप्राइज देगा | हांलाकि उसके बाद उसे अपने आप को बहुत ही रोकना पड़ रहा था ये राज़, राज़ ही रखने के लिए, पर फिर भी उसने किसी तरह खुद को रोक लिया | धीरे-धीरे एक-एक दिन कटते-कटते वो दिन भी आ गया जिस दिन उसकी परीक्षा थी, उसने ये सोचा था की परीक्षा देकर वही से बाहर ही बाहर रेलवे स्टेशन के लिए निकल जायेगा, परन्तु परीक्षा देकर निकलने के बाद जैसे ही वो ऑटो में बैठ कर निकला सबसे पहले तो ऑटो ख़राब हो गया, फिर जैसे-तैसे कर के वह से निकला तो ट्रैफिक में फंस गया जिस से उसको लगा की वह वक्त पर स्टेशन नहीं पहुँच पायेगा, मन ही मन वो यह भी सोच रहा था की चलो अच्छा है की मैंने किसी को बताया नहीं कि मै आ रहा हूँ अगर ट्रेन छूट भी गयी तो कोई बात नहीं, पर होनी को कौन टाल सकता था जब वह स्टेशन पंहुचा तो उस समय ट्रेन रवाना होने के लिए तैयार थी और सिग्नल भी हो चुका था, दौड़ते हुए वो प्लेटफोर्म पर पंहुचा और जैसे ही अपने रिज़र्व डब्बे में चढ़ा ट्रेन चल दी | सबको सरप्राइज देकर उनका हैरान चेहरा कैसा होगा ये सोचते सोचते उसको कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला |