गतांक से आगे ....
उसके बाद राधिका घर के कामों में व्यस्त हो गयी और श्याम अपने जीजा जी के साथ बाहर के कामो में, शाम को एक छोटी सी पार्टी हुई जिसमे केक काटा गया | उसके अगले दिन श्याम लौट कर वापस अपने शहर आ गया | वापस आने के बाद दोनों के बीच की बात-चीत का सिलसिला और बढ़ गया जिसमे की ज्यादातर सरप्राइज की ही बातें होती थी | राधिका का तो पता नहीं पर धीरे-धीरे श्याम के लिए राधिका अब आदत बन चुकी थी, अगर कुछ घंटे भी बात न करता तो उसे गुस्सा आने लगता था, राधिका अगर मजाक में भी किसी और लड़के की बातें करती तो तो नाराज हो जाता था, श्याम के लिए ये बातों का सिलसिला कब प्यार में बदल गया ना उसे पता चला और ना ही राधिका को, काफी परेशान होने के बाद श्याम ने आखिर एक दिन सोचा कि राधिका को अपनी हालत बता ही दे, पर वो अन्दर ही अन्दर डरता था कि अगर राधिका ने उससे बात करना भी बंद कर दिया तो वो कैसे रह पायेगा, इसी उधेड़बुन में कई दिन बीत गए और एक दिन...
उसके बाद राधिका घर के कामों में व्यस्त हो गयी और श्याम अपने जीजा जी के साथ बाहर के कामो में, शाम को एक छोटी सी पार्टी हुई जिसमे केक काटा गया | उसके अगले दिन श्याम लौट कर वापस अपने शहर आ गया | वापस आने के बाद दोनों के बीच की बात-चीत का सिलसिला और बढ़ गया जिसमे की ज्यादातर सरप्राइज की ही बातें होती थी | राधिका का तो पता नहीं पर धीरे-धीरे श्याम के लिए राधिका अब आदत बन चुकी थी, अगर कुछ घंटे भी बात न करता तो उसे गुस्सा आने लगता था, राधिका अगर मजाक में भी किसी और लड़के की बातें करती तो तो नाराज हो जाता था, श्याम के लिए ये बातों का सिलसिला कब प्यार में बदल गया ना उसे पता चला और ना ही राधिका को, काफी परेशान होने के बाद श्याम ने आखिर एक दिन सोचा कि राधिका को अपनी हालत बता ही दे, पर वो अन्दर ही अन्दर डरता था कि अगर राधिका ने उससे बात करना भी बंद कर दिया तो वो कैसे रह पायेगा, इसी उधेड़बुन में कई दिन बीत गए और एक दिन...
राधिका " क्या बात है? आज आप ठीक से
मैसेज नहीं कर रहे हैं कोई प्रॉब्लम है क्या?
"
श्याम " नहीं-नहीं ऐसी कोई बात नहीं है "
राधिका " नहीं कोई बात है बताइए क्या बात है?
"
श्याम " कोई बात नहीं है बस मूड ठीक नहीं
है "
राधिका " वही तो पर क्यों ठीक नहीं है?
"
श्याम " आपको कैसे पता चला की मेरा मूड ठीक नहीं
है "
राधिका " आपके बारे में मुझे सब पता चल जाता
है "
श्याम " मैसेज पढ़ कर ? "
राधिका " हाँ "
श्याम " कैसे "
राधिका " बस पता चल जाता है, मुझे महसूस हो
जाता है "
श्याम " अच्छा जी ये बात है, और क्या महसूस
होता है? "
राधिका " यही की आप मुझसे कुछ कहना चाहते हैं पर
कह नहीं रहे हैं "
श्याम " मैंने आपसे कब छुपाया है? जो अब छुपाऊंगा? "
राधिका " वही तो जब कभी नहीं छुपाया तो अब क्यों
छुपा रहे हैं? वैसे भी आप कई
दिन से कुछ कहना चाहते हैं पर कह नहीं रहे हैं
"
श्याम " हाँ कहना तो है "
राधिका " तो कहिये, क्या बात है?
"
श्याम " आप नाराज़ तो नहीं होंगी ना? "
राधिका " आज तक नाराज हुई हूँ क्या किसी बात पर? "
श्याम " नहीं
"
राधिका " तो फिर कहिये क्या कहना है? वैसे मुझे थोडा
अनुमान तो है पर मै आपके मुह से सुनना चाहती हूँ
"
श्याम " अगर ये बात है तो मै भी आज बोल ही देता
हु मेरी भी टेंशन आज ख़त्म हो जाएगी "
राधिका थोडा
झुंझलाते हुए " COME ON ! TELL ME NOW (चलिए बता भी
दीजिये) ”