गतांक से आगे ....
राधिका ये पढ़ कर हैरान रह गयी, पता नहीं क्यों उसको उम्मीद ना थी की उसको इतनी जल्दी ये सुनने को मिलेगा हांलाकि वो ये जानती जरुर थी कि ऐसा ही कुछ है, और आज नहीं तो कल ऐसा जरुर होगा | कहीं न कहीं ये बात वो सुनना भी चाहती थी और बोलना भी पर वो पहल कैसे करती वो एक लड़की थी और वो श्याम के पहल करने का इंतज़ार कर रही थी और अब जबकि श्याम को जो बोलना चाहिए था बोल चुका था तो वो विश्वास नहीं कर पा रही थी और साथ ही साथ उसे श्याम पर गुस्सा आ रहा था कि इतना लेट क्यों बोला और धीरे-धीरे गुस्सा प्यार पर हावी होता गया और बिना कोई रिप्लाई किये वो ऑफ लाइन हो गयी | इधर श्याम की हालत ख़राब हो रही थी क्युकि वो समझ नहीं पा रहा था की उसने जो किया वो सही था या गलत था, जैसे-जैसे सोचता वैसे-वैसे उसको ये बात गलत लगती और और वो अपने आप को धिक्कारने लगा था कि उसने ऐसा क्यों किया, उसे ऐसा नहीं बोलना चाहिए था | अब उसे डर भी लगने लगा था, कहीं राधिका इस बात का बुरा न मान जाए और घर वालों से ना बात कर ले, हांलाकि उसे घर वालो के पता चलने का उतना डर नहीं था जितना कि राधिका के गुस्सा होने का | श्याम लगातार राधिका को मैसेज पर मैसेज किये जा रहा था पर राधिका तो ऑफ लाइन हो चुकी थी, कोई जवाब न पा कर श्याम ने राधिका को फ़ोन किया उसने फ़ोन नहीं उठाया, लगातार कई बार करने पर आखिर राधिका ने फ़ोन उठाया
राधिका ये पढ़ कर हैरान रह गयी, पता नहीं क्यों उसको उम्मीद ना थी की उसको इतनी जल्दी ये सुनने को मिलेगा हांलाकि वो ये जानती जरुर थी कि ऐसा ही कुछ है, और आज नहीं तो कल ऐसा जरुर होगा | कहीं न कहीं ये बात वो सुनना भी चाहती थी और बोलना भी पर वो पहल कैसे करती वो एक लड़की थी और वो श्याम के पहल करने का इंतज़ार कर रही थी और अब जबकि श्याम को जो बोलना चाहिए था बोल चुका था तो वो विश्वास नहीं कर पा रही थी और साथ ही साथ उसे श्याम पर गुस्सा आ रहा था कि इतना लेट क्यों बोला और धीरे-धीरे गुस्सा प्यार पर हावी होता गया और बिना कोई रिप्लाई किये वो ऑफ लाइन हो गयी | इधर श्याम की हालत ख़राब हो रही थी क्युकि वो समझ नहीं पा रहा था की उसने जो किया वो सही था या गलत था, जैसे-जैसे सोचता वैसे-वैसे उसको ये बात गलत लगती और और वो अपने आप को धिक्कारने लगा था कि उसने ऐसा क्यों किया, उसे ऐसा नहीं बोलना चाहिए था | अब उसे डर भी लगने लगा था, कहीं राधिका इस बात का बुरा न मान जाए और घर वालों से ना बात कर ले, हांलाकि उसे घर वालो के पता चलने का उतना डर नहीं था जितना कि राधिका के गुस्सा होने का | श्याम लगातार राधिका को मैसेज पर मैसेज किये जा रहा था पर राधिका तो ऑफ लाइन हो चुकी थी, कोई जवाब न पा कर श्याम ने राधिका को फ़ोन किया उसने फ़ोन नहीं उठाया, लगातार कई बार करने पर आखिर राधिका ने फ़ोन उठाया
राधिका गुस्से
से " क्या है? क्यों परेशान
कर रहे हैं? "
श्याम " सॉरी "
राधिका " किसलिए? "
श्याम " व्हाट्स एप्प के लिए जो बोला था उसके
लिए "
राधिका " मै आपको ऐसा नहीं समझती थी "
श्याम " ये मेरी भावनाएं थी अगर मै इनको व्यक्त
नहीं करता तो बर्बाद हो जाता मै "
राधिका " मतलब अगर आप मुझे नहीं बताते तो बर्बाद
हो जाते? "
श्याम " हां "
राधिका " वो कैसे? "
श्याम " बस हो जाता, आगे आपकी मर्जी
कोई दबाव नहीं है आप पर "
राधिका " वो तो आप वैसे भी नहीं डाल पायेंगे
"
श्याम " मेरे कहने का मतलब है कि, आप चाहें तो
दोस्ती रख सकतीं हैं या ख़त्म कर सकतीं हैं
"
राधिका " इतना होने के बाद आपको लगता है कि पहले
जैसे दोस्ती हो पायेगी?
"
श्याम " मुझे नहीं पता, पर इतना मुझे
पता है की मै आपको कभी अपना दोस्त नहीं मान पाउँगा "
राधिका " क्यों? "
श्याम " क्युकि आप मेरे लिए एक दोस्त से बढ़ कर
बन गयीं हैं "
राधिका " क्या बन गयी हूँ मै? जरा ये भी तो
जानू मैं "
श्याम " आपको अब पता है की आप मेरे लिए क्या हैं? आगे आपकी मर्जी
मै फ़ोन रख रहा हूँ "
राधिका " सुनिए तो "
श्याम " बोलिए "
राधिका " क्या आपको लगता है कि ये जानने के बाद
मै पहले जैसा सोच सकूंगी ?
"
श्याम " मतलब ? "
राधिका " मतलब कि पहले कभी ऐसा नहीं सोचा था
मैंने, और आपको हमेशा
अपना अच्छा दोस्त ही माना था क्योकि मुझे लगता था की आप मुझे अपना दोस्त मानते
हैं "
श्याम " तो?
"
राधिका " तो ये कि अब आप तो मुझे अपना दोस्त
मानते ही नहीं हैं और ये चाहते हैं की मैं आपको अभी भी वही पुराना वाला दोस्त
मानूं "
श्याम " हां मैं आपको अब अपना दोस्त नहीं मानता
हूँ पर दोस्त से बढ़कर मानता हूँ "
अगले भाग में जारी ....
अगले भाग में जारी ....
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