श्याम " नहीं उस परीक्षा का क्या? "
राधिका " उसका रिजल्ट आ गया, और आप पास भी
हो गए हैं, तो बनती है ना
मिठाई? "
श्याम " क्या बात कर रही हैं आप? आपको कैसे पता
आपको मेरा रोल नंबर कैसे पता चला कि आपने मेरा रिजल्ट देख लिया? "
राधिका " आपने जो फर्जी वाला एडमिट कार्ड भेजा था
उसपर केवल डेट बदला था जबकि रोल नंबर के साथ सारे डिटेल्स सही थे मैंने उसी की मदद
से देखा "
श्याम " अच्छा! मैं भी देखता हूँ "
राधिका " ठीक है, देखिये फिर बताइए की पार्टी कब है? "
श्याम ने तुरंत
अपना रिजल्ट देखा और रिप्लाई किया
श्याम " अभी तो इंटरव्यू बाकी ही है "
राधिका " जैसे ये हुआ वैसे ही इंटरव्यू भी हो
जायेगा, आप बस ये बतईये
कब दे रहे हैं पार्टी?
"
श्याम " आपको कब चाहिए? "
राधिका " जब आप दें "
श्याम " ठीक है आ जाइये, मै पार्टी दे
देता हूँ "
राधिका " अभी तो नहीं आ सकती पर जब मै आपसे
मिलूंगी तब लुंगी पार्टी "
श्याम " ठीक है "
उसके बाद श्याम जी जान से अपने इंटरव्यू के लिए तैयारी करने
लगा | और उसको अपने
मेहनत का फल भी मिला, अब वो बैंक के
ब्रांच पर सहायक शाखा प्रबंधक के पद पर तैनात हो गया था | नौकरी मिलने के
बाद राधिका और श्याम के बीच में दिन को तो बात नहीं हो पाती थी पर रात में दोनों
जरुर बात करते थे | धीरे-धीरे कई
महीने बीत गए और उधर मोहन की शादी की सालगिरह भी आ गयी | मोहन को ये तो
पता था की श्याम की जिंदगी में कोई है पर कौन है उसे ये नहीं पता था | सालगिरह की
पार्टी के लिए मोहन ने सबको बुलाया जिसमे उसने अपनी छोटी बहन के पुरे परिवार को भी
बुलाया, सब तो आ चुके
थे पर अभी तक राधिका का कोई समाचार नहीं था जबकि श्याम सालगिरह की पार्टी के एक
दिन पहले आने वाला था | सारी तैयारियां
हो चुकी थी जब मोहन ने आखिरी बार राधिका को बुलाने के लिए फ़ोन किया
मोहन " हेल्लो ! राधिका जी आप कब आ रही हैं
यहाँ ? "
राधिका " भैया मै तो एक ही शर्त पर आउंगी जो आपको
मनना पड़ेगा "
मोहन " पहले शर्त तो बताइए "
राधिका " शर्त ये है की किसी को पता नहीं चलना
चाहिए कि मै आ रही हूँ और श्याम ही मुझे लेने रेलवे स्टेशन आये "
मोहन " ये कैसी शर्त है? "
राधिका " उन्होंने मुझे भाभी की शादी की सालगिरह
में मुझे सरप्राइज दिया था "
मोहन " तो उसका यहाँ क्या लेना देना है? "
राधिका " तो उस समय मैंने उन्हें एक सरप्राइज
देने का वादा किया था "
मोहन " पर मुझे उसे ये तो बताना पड़ेगा न कि
आपको रेलवे स्टेशन लेने जाना है उसे?
"
राधिका " कोई बहाना बना दीजिये ये आपके ऊपर है
"
मोहन "
ठीक है देखते हैं पर आप आ रही हैं ना?
"
राधिका " आपको ये शर्त मंजूर है या नही? "
मोहन " ठीक है "
राधिका " ठीक है मै आ रही हूँ, और एक बात किसी
को भी पता नहीं चलना चाहिए की मै आ रही हूँ "
मोहन " कब?
"
राधिका " सालगिरह वाले दिन सुबह ४ बजे की गाड़ी से
"
मोहन " ठीक है, मै श्याम से बात करता हूँ "
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