गाँव की पंचायत बैठी थी और
रमेसर पर बहुत ही गंम्भीर इल्जाम लगाया जा चुका था, इस बात का फैसला पंचायत ही कर सकती थी उसे इस इल्जाम की
क्या सजा मिलनी है, एक कोने में
रमेसर और उसका बापू अपने छोटे भाई के साथ खड़े थे और दुसरे कोने में सविता अपने बड़े
भाई और बापू के साथ खडी थी, रमेसर पर इल्जाम था इसी सविता से मिलने वो रात में
चुपके-चुपके गया था | सविता के
पिता और भाई बहुत ही गुस्से में नजर आ रहे थे और सविता चुप-चाप नज़रें झुकाए हुए
अपने पैर के अंगूठे से जमीन की मिटटी कुरेदने में लगी थी, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था, उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि कल रात को रमेसर से उसका मिलना भाई देख चुका है, आज सुबह जब वो अपने घर के कामों में व्यस्त थी तब उसको
पंचायत से बुलावा आया था | पंचायत
पहुचने पर उसने देखा कि एक तरफ रमेसर और दूसरी तरफ उसके बापू और भाई खडें हैं |
पंचों में से एक ने उठ कर
सविता की तरफ देख कर बोला " बोल सब्बो ! क्या ये सही है की कल रात को रमेसर
तुझे मिलने घर में घुस आया था आया था ?" सविता कुछ नहीं बोली और सर झुका कर खड़ी रही | उसके पिता ने उसका हाँथ पकड़ कर बीच पंचायत में धकेलते हुए
बोला " बोलती क्यों नहीं है ? गूंगी
हो गयी है क्या ? " सविता डर से
थर-थर कांपते हुए अपनी गर्दन हाँ में हिला दी | पंच ने उस से आगे पूछा " क्या तू इस बारे में जानती थी
कि रमेसर तुझसे मिलने आने वाला था? " सविता जानती तो थी पर उसने अपने भाई और बापू के डर से ना
में गर्दन हिला दी, ये देख कर
रमेसर की आँखों में आंसू आ गए और उसने चीख कर बोला " झूठ बोलती है ये, इसको पता है मैं इस से प्यार करता हूँ और ये भी मुझ से
प्यार करती है " सविता का भाई आगे बढ़ा और गाँव वालों के बीच से निकलता हुआ
रमेसर के सामने पहुंचा और उसको एक जोर का घूंसा मारा फिर चिल्लाया " झूठ
बोलता है कमीने, मेरी बहन को बदनाम करता
है,
मैं तुझको जिन्दा नहीं छोडूंगा " और रमेसर का गला
दबाने लगा जबकि पुरे गाँव वाले भी उसके समर्थन में चीखने लगे " मार डाल-मार
डाल " अराजकता फैलते देख मुख्य पंच जो गाँव के मुखिया भी थे खड़े हुए और लोगों
को शांत कराया और रमेसर को छुड़ाया फिर उन्होंने पूछा " कोई सबूत है क्या तेरे
पास " रमेसर सबूत के नाम पर चुप रह गया और नीचे जमीन देखने लगा, "मतलब कोई सबूत नहीं है " मुखिया जी ने बोला " तू
एक सीधी-साधी लड़की को बदनाम करना चाहता है, रमेसर तेरे माँ-बाप ने तुझे यही सिखाया है, अब तू बता की ये बदनामी सुन कर कौन परिवार सविता को अपनाएगा, इस बिचारी लड़की की तो जिंदगी ही ख़राब हो जाएगी "
मुखिया जी बोले " तूने पंचायत की नजर में अपराध किया है और तुझे इसकी कड़ी सजा
मिलेगी ?
" बोल कर मुखिया जी पंचों के बीच में जा कर
बैठ गए और उनसे सलाह-मशवरा करने लगे, इधर रामेसर के बापू और चाचा अपना हाँथ जोड़े पंचो की तरफ नम
आँखों से देख रहे थे | थोड़ी देर के
बाद मुखिया जी उठे " रमेसर तूने बहुत बड़ा गुनाह किया है और इस गुनाह के लिए
कोई भी सजा छोटी मालूम होती है फिर भी पंचों ने ये फैसला किया है कि पहले तुझे भरी
पंचायत में पचास कोड़े सविता का भाई या बापू लगाएगा फिर उसके बाद तुझे और तेरे
परिवार को गाँव निकाला का आदेश
दिया जाता है, और पंचायत सब्बो के बापू
को हिदायत देती है कि उसकी शादी जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी कर दी जाए और इसमें
पूरा गाँव और ये पंचायत उसकी मदद करेगी " उन्होंने आगे बोला " कोड़े लगा
कर ही ये पंचायत बर्खास्त की जाएगी " रमेसर का बापू हाँथ जोड़ कर बोला "
मुखिया जी ! गलती तो इस
नालायक रमेसर ने की है तो फिर उसकी सजा हमें क्यों, आप इसके साथ चाहे जो कीजिये लेकिन इसमें मेरे परिवार को
गाँव निकला ना दीजिये अभी मेरी दो लड़कियां हैं उनकी शादी कैसे होगी, इसमें उनका क्या दोष है, उनको क्यों सजा मिल रही है, भले ही आप रमेसर को मार डालिए मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है, ऐसी नालायक औलाद से तो बेऔलाद होना अच्छा है " मुखिया
जी बोले " नहीं पंचों का फैसला अब नहीं बदल सकता है और तुम्हे मानना ही पड़ेगा, तुमने ही ऐसे घटिया संस्कार दिए हैं अपनी औलाद को, जब एक ऐसा है तो बाकी भी ऐसे ही होंगे, और एक मछली पुरे तालाब को गन्दा करे उस से अच्छा है की उस
मछली को ही बहार निकल दिया जाए, हम
नहीं चाहते की गाँव के बाकी लड़के भी इस से प्रभावित होकर भविष्य में ऐसा गन्दा काम
करें,
तुम्हे पंचो के फैसले का मान रखना ही होगा "
कोड़े लगाने की प्रक्रिया शुरू
हुई,
कोड़े का दर्द तो था ही पर बेवफाई का दर्द उस से ज्यादा था, अभी मुश्किल से कुछकोड़े ही लगे थे, अगला कोड़ा लगाने के
लिए सविता के भाई ने हाँथ उठाया ही था कि सविता आगे बढ़ कर आई और रमेसर के ऊपर लेट
गयी,
उसने रोना शुरू कर दिया और साथ ही चीख कर बोली " हाँ
मै इनसे प्यार करती हूँ " सविता के भाई का हाँथ हवा में ही रुक गया, वो आवाक् था, पंचायत आवाक् थी, पूरा गाँव आवाक् था | रमेसर का बापू आगे बढ़ा और हाँथ जोड़ कर बोला " माई-बाप
ये कौन सा इन्साफ है, गलती तो
दोनों ने ही की है तो सजा भी दोनों को मिलना चाहिए ?" सविता अब भी रोये जा रही थी और अपने पल्लू से रमेसर के माथे
का पसीना पोंछ रही थी जब उसके बापू ने आ कर उसको एक लात मारा और बोला "मुखिया
जी इसको तो मौत की सजा दे दीजिये मुझे नहीं चाहिए ऐसी औलाद " मुखिया अपना सर
पकड़ कर बैठ गए और बाकी के पंच एक दुसरे को देखने लगे तब रमेसर का बापू में बोला
" मुखिया जी सबसे अच्छा तो होता कि इन दोनों का विवाह किया जा सकता, पर ये भी संभव नहीं है दोनों परिवारों की जाति में बहुत
अंतर है " पंच समझ नहीं पा रहे थे कि इस नाकाबिले माफ़ी गुनाह की क्या सजा दी
जाए,
थोड़ी देर पहले तक तो सब ठीक था पर अचानक से सविता ने सच्चाई
बता कर सबको हैरान कर दिया था, मुखिया
जी खड़े हुए " दोनों ने ऐसा गुनाह किया है की माफ़ी की तो कोई सोच भी नहीं सकता
है,
दोनों का विवाह भी नहीं हो सकता है, दोनों की जाति अलग है, एक नीची जाति के रमेसर ने अपने से ऊँची जाति के सविता से
प्यार करने का जो दुह्साहस किया है उसकी सजा छोटी-मोटी भी नहीं हो सकती है | सबको पता है ऐसे में क्या करना चाहिए इसलिए पंचायत रमेसर और
सब्बो के घर वालों को हिदायत देती है कि ऐसे मामले में जो सदियों से होता आया है
वही करें ,
गाँव के लोग उनका साथ दे सकते हैं, कल तक का समय है अगर उन्होंने कल तक इन्होंने खुद दोनों को
सजा नहीं दी तो पंचायत दोनों परिवारों को भी इसी गुनाह का भागीदार मानेगी और
उन्हें भी वही सजा देगी जो इन दोनों को मिलनी है "
अगले दिन सुबह खेतों की तरफ
जाने वाले लोगों ने देखा, गाँव के
बाहर के बरगद के विशाल पेड़ पर कोई दो व्यक्ति झूल रहे हैं, नजदीक से जा कर देखने पर मालूम हुआ कि रमेसर और सविता ने
आत्महत्या कर ली है, दोनों ने
मरते दम तक एक दुसरे का हाँथ थामा हुआ था, सबको पता था कि ये आत्महत्या नहीं है उस नाकाबिले माफ़ी
गुनाह की सजा है जो उन दोनों ने किया था, प्यार नामक गुनाह, जाति से ऊपर उठकर प्यार, पर ये सवाल हमेशा मुह बाये खड़ा
रहेगा प्यार वाकई एक गुनाह है ?
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