गतांक से आगे ....
राधिका से बात करने के बाद मोहन ने बहुत देर तक सोचा की क्या बहाना बनाये और ये चक्कर क्या है पर मोहन को कुछ समझ नहीं आया | अभी मोहन सोच ही रहा था की उनकी पत्नी ने उनको बताया की उनके कुछ रिश्तेदार आ रहे हैं जिनको लेने के लिए जाना होगा और तभी मोहन के दिमाग में एक बार आई, और उसने श्याम को फ़ोन किया
राधिका से बात करने के बाद मोहन ने बहुत देर तक सोचा की क्या बहाना बनाये और ये चक्कर क्या है पर मोहन को कुछ समझ नहीं आया | अभी मोहन सोच ही रहा था की उनकी पत्नी ने उनको बताया की उनके कुछ रिश्तेदार आ रहे हैं जिनको लेने के लिए जाना होगा और तभी मोहन के दिमाग में एक बार आई, और उसने श्याम को फ़ोन किया
मोहन " कब आ रहे हो सालगिरह पर? "
श्याम " बताया तो था भैया कि सालगिरह वाले दिन
से एक दिन पहले शाम को आऊंगा "
मोहन "
वो तो ठीक है पर एक समस्या है "
श्याम " क्या? "
मोहन " हमारा एक रिश्तेदार है जो सालगिरह से एक
दिन पहले आ रहा है, उसको लाना है
"
श्याम " कौन आ रहा है? "
मोहन " तुम्हारी भाभी के भैया "
श्याम " कब?
"
मोहन " सालगिरह वाले दिन सुबह ४ बजे की गाड़ी से
"
श्याम "
उनको कोई और ट्रेन नहीं मिली क्या?
" '
मोहन " नहीं मिली तभी तो "
श्याम " ओ तो समस्या ये है की उन्हें लेने के
लिए सुबह स्टेशन जाना पड़ेगा?
"
मोहन " हाँ "
श्याम " ये तो बहुत बड़ी समस्या है "
मोहन " है तो कोई समाधान है क्या इसका? "
श्याम " सोचने दीजिये "
मोहन " ठीक है "
श्याम " एक समाधान है "
मोहन " क्या? "
श्याम " मै रुक कर उनको लेते हुए आऊँ "
मोहन "
हाँ ये सही है पर तुमको कोई समस्या न हो तो "
श्याम "
सुबह उठने में दिक्कत तो होगी पर मै कर लूँगा "
मोहन " तो ये ठीक रहा की तुम शाम को ना आ कर
सुबह उनको लेकर आओगे "
श्याम " मगर मै उनको पहचानता नहीं हूँ " '
मोहन "
ट्रेन तो पता ही है मै सीट नंबर और बोगी नंबर बता दूंगा तुम ढूढ लेना और वो
तुम्हे पहचानते हैं "
श्याम " फिर ठीक है मै उन्हें लेता आऊंगा "
उसके बाद मोहन ने राधिका से पूछ कर सारी बातें श्याम को बता
दी, पर अभी तक मोहन
की समझ में ये नहीं आया था कि ये क्या चल रहा है पर उसने सोचा की जो भी होगा श्याम
उसे बता ही देगा आखिर बचपन से उसने कुछ छुपाया नहीं है तो ये क्यों छुपायेगा | उसके बाद मोहन
अपने पार्टी की तैयारियों में लग गया |
आख़िरकार वो दिन
आ ही गया जिस दिन राधिका के द्वारा श्याम को सरप्राइज मिलने वाला था | नियत दिन और
समय पर श्याम जब अपने बाइक से रेलवे स्टेशन जा रहा था तो वो थोडा गुस्से में भी था
की आखिर क्यों उसने ऐसा कहा की " मै
लेता आऊंगा " | खैर मन ही मन
कुढ़ते हुए वो स्टेशन पर पंहुचा और ट्रेन का इंतज़ार करने लगा, जोकि अपने नियत
समय से २० मिनट की देरी से चल रही थी |
जैसे-तैसे कर
के श्याम ने समय काटा और आखिरकार गाड़ी के भी आने का सिग्नल हो गया | ट्रेन के
प्लेटफोर्म पर पहुचते ही श्याम दौड़ कर उस बोगी के पास पंहुचा जिसमे राधिका को आना
था | वो बेसब्री से
इन्तजार करने लगा की कौन है वो जो इस ट्रेन से आ रहा है और जिसको लेकर उसे जाना था
| अचानक श्याम के
कंधे पर किसी ने हाँथ रखा, और श्याम जैसे
ही पीछे मुड़ा, उसके आश्चर्य
का ठिकाना ही नहीं रहा, सुबह ४
बजे रेलवे स्टेशन के प्लेटफोर्म नंबर ३ पर
राधिका खड़ी थी, एक बार को तो
श्याम ने सोचा की ज्यादा जल्दी उठने और बहुत ज्यादा राधिका के बारे में सोचने के
कारण उसे वह इंसान राधिका दिख रही है
अगले भाग में जारी ....
अगले भाग में जारी ....
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