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Sunday, June 21, 2015

व्हाट्सएप्प - भाग-11

गतांक से आगे ....

राधिका  " क्या ये आप हैं? "
श्याम  " हाँ हूँ तो मै ही जब मुझे मैसेज किया है तो मै ही होऊंगा ना "
राधिका  " नहीं-नहीं आप मेरी सगाई में आयें हैं क्या? "
श्याम  " हाँ आया तो हूँ, मुझे भी बुलाया गया है "
राधिका  " और आप मेरी बरबादी देखने के लिए आ गए? "
श्याम  " बरबादी कहाँ आप तो आज आबाद हो रही हैं "
राधिका  " ये मजाक का समय नहीं है, सच बताइए क्या हो रहा है ये सब "
श्याम  " आपकी सगाई होने वाली है अभी थोड़ी देर में और आपके घर वाले और लड़के के घर वाले मिल कर शादी का दिन तय कर रहे हैं अभी तो "
राधिका  " फिर मजाक? मैंने पूछा आप यहाँ क्या कर रहे हैं? "
श्याम  " क्या चाहती हैं आप की मै न रहूँ यहाँ? चला जाऊ? "
रधिका  " अगर आपको मुझे रोते हुए देखने का शौक है तो रुकिए वरना चले जाइये मै आपका चेहरा भी नहीं देखना चाहती हूँ "
श्याम  " अगर मै चला गया तो समस्या हो जाएगी "
राधिका  " कैसी समस्या? "
श्याम  " आज तक तो मैंने नहीं देखा है की बिना लड़के के ही सगाई हो जाये "
राधिका  " मतलब ? "
श्याम  " मतलब ये मेरी जान, कि मै ही हूँ आपका होने वाला पति, तो कैसा लगा ये सरप्राइज "
राधिका  " अगर ये सच है तो फिर आप नहीं बचेंगे, और अगर झूठ है तो भी आप नहीं बचेंगे  "
सालगिरह के कुछ ही दिनों के बाद राधिका ने अपनी भाभी को ये बात बता दी और उसकी भाभी ने श्याम को फ़ोन किया और सच को जाना, इसके बाद उन्होंने श्याम से पूछा की करना क्या है, और श्याम ने अपना प्लान बताया की क्या, कब और कैसे करना है, शादी कोई छोटा सा काम नहीं है कि कुछ अपरिपक्व लोग मिल कर फैसला कर सकें, इस काम को करने के लिए सबको राजी होना जरुरी होता है क्युकि ये केवल दो लोगो का ही नहीं बल्कि दो परिवारों का मिलन समारोह होता है, केवल शादी से ही दो अलग-अलग परिवार मिलकर एक हो जाते हैं न केवल एक पीढ़ी बल्कि अगली कई पीढ़ियों का रिश्ता हो जाता है ये, इसलिए राधिका और श्याम ने ये फैसला किया था की अगर घर वाले माने तब ही वो दोनों शादी करेंगे वरना नहीं | खैर मोहन ने श्याम के पिताजी से और राधिका की भाभी ने राधिका के पिताजी से बात की और दोनों ने मिल कर किसी तरह उनको मना लिया एक बार को बात कुंडली पर आ कर रुकी पर किसी तरह उसको भी संभल लिया गया जिसमे की पंडित ने ये बताया कि कोई पूजा है जो विवाह से पहले संपन्न करना होगा बाकी सब ठीक था | उधर राधिका की भाभी ने राधिका को नहीं बताया कि उसके पिता जी इस शादी के लिए मान गए हैं और किसी तरह अपने ससुर और सास को भी मना लिया कि जब तक सगाई का दिन नहीं आता तब तक राधिका को भी ये बात ना बताई जाये | जबसे राधिका को पता चला था कि उसकी शादी श्याम से नहीं हो किसी और से हो रही है तब से वो अकेले में चुहुप छुप कर रोती थी, उधर श्याम ये राधिका की ये हालत देख देख कर परेशान रहता था | पर इन सब के बीच में वो बस यही सोचा करता था कि जब राधिका को सच्चाई का पता चलेगा तो उसके चेहरे पर जो शर्म की लाली फैलेगी वही इस नाटक का फल होगा, और आज वो राधिका को इतना खुश देख कर, खुश था कि उसने सरप्राइज ये फैसला लिया, हांलाकि वो ये जानता था कि अब उसे राधिका के वो प्यार भरे झगड़े उसे जिंदगी भर खुश रखेंगे |



-: समाप्त :-

Sunday, June 14, 2015

व्हाट्सएप्प - भाग-10

गतांक से आगे ....

श्याम समझ तो चुका था कि मोहन को सब पता चल गया है और वो इस मौके को कैसे भुनाए इस पर विचार करने लगा, थोड़ी देर सोचने के बाद बोला
श्याम  " बाकी सब तो ठीक है, पर इस कहानी का अंत क्या होगा "
मोहन मुस्कुराते हुए  " ह्म्म्म ये तो तुम्हे सोचना है  "
श्याम  " हाँ पर कोई आईडिया तो दीजिये? "
मोहन  " अंत में शादी करा दो "
श्याम  " पर घर वालो से बात कौन करेगा "
मोहन  " हीरो का भाई "
श्याम  " पर ये रोमांचक नहीं होगा "
मोहन  " तुम्हारे पास कोई आईडिया है तो बताओ? "
श्याम  " शादी तो करा दें दोनों की पर सरप्राइज के साथ "
मोहन  " मतलब? "
श्याम  " या तो दोनों को सरप्राइज दिया जाये या फिर किसी एक को "
मोहन  " दोनों को देना मुश्किल है, किसी एक को ही देना होगा, पर किसको? "
श्याम  " राधिका को, उसको सरप्राइज बहुत पसंद है "
मोहन हँसते हुए  " राधिका ? वो कहा से आ गयी इस कहानी में? "
श्याम  " बस ! रहने दीजिये आपको भी पता है की कहाँ से आई और मुझे भी "
मोहन हँसते हुए  " क्या पता है? "
श्याम  " मेरी मदद करेंगे या नहीं ? "
मोहन गंभीर होकर  " क्यों नहीं? पर मुझे पूरी बात शुरू से बताओ और ये भी किसको-किसको पता है? " 
श्याम  " आपके अलांवा किसी को नहीं "  और फिर उसने पूरी बात बता दी
मोहन  " तो अब करना क्या है? चाचा जी तो तुम्हारे लिए रिश्ता ढूढ रहे हैं और उधर राधिका के पिता जी भी उसके लिए लड़के देख रहे हैं "
श्याम  " बस दोनों को याद दिलाना है, एक दुसरे की जरुरत वो दोनों ही मिल कर पूरी कर सकते हैं "
मोहन  " पर उनको याद कौन दिलाएगा? "
श्याम  " पापा को आप याद दिलाइये और उनके लिए मै किसी और को पकड़ता हूँ "
मोहन  " किसको ? "
श्याम  " राधिका से बात करता हूँ और दीदी से भी "

मोहन  " ठीक है "

सालगिरह के दिन से करीब चार महीने के बाद गर्मी का महिना था ऐसा लगता था कि सूर्य देव भी राधिका के गम में शामिल होने के लिए अपनी सम्पूर्ण ऊष्मा के साथ खुद पधार चुके हैं, आज राधिका की सगाई थी, कोई अनजान सा लड़का था जिसे उसके पिता जी ने पसंद किया था, वो तो यहाँ तक नाराज थे कि राधिका को उस लड़के का फोटो भी दिखाना सही नहीं समझा था | उधर राधिका भी अपने घर वालों से इतना नाराज थी कि उसने फोटो देखने की जिद भी नहीं की और अपनी भाभी को जब वो सबसे छुपाकर फोटो दिखने लायीं तो बोल दिया की अगर पिताजी किसी अंधे लूले लंगड़े से भी मेरी शादी कराएँगे तो भी मै तैयार हूँ | उस पंच सितारा होटल के एक कमरे में राधिका अपने भाभी और सहेलियों के साथ बैठी तैयार हो रही थी जबकि वो लड़का और उसका परिवार अभी आने वाले थे, इसी पंच सितारा होटल में आज उनकी सगाई हो रही थी जो एक दुसरे से अनजान थे यहाँ तक कि कभी एक दुसरे को देखा भी नहीं था | राधिका अभी अपने सर का पल्लू ठीक कर रही थी तब तक उसकी एक सहेली ने बोला लड़के वाले आ गए और लड़का तो सच में लंगड़ा है और वो हंसाने लगी, राधिका ने अचानक चौक कर ऊपर देखा तो उसे किसी की एक झलक उस शीशे में दिखाई दी जो वहां लगाया गया था और जिसके सामने बैठ कर राधिका तैयार हो रही थी, राधिका ने धड़कते हुए दिल से अपना फ़ोन उठाया और तुरंत श्याम को मैसेज किया 

अगले भाग में जारी ....

Sunday, June 7, 2015

व्हाट्सएप्प - भाग-9

गतांक से आगे ....

फिर दोनों वहां से निकल कर चल दिए, घर पहुचने के बाद दोनों अपने अपने काम में व्यस्त हो गए और फिर आपस में बात करने का समय ही नहीं मिला, उधर मोहन ये जानने के लिए बेचैन हो रहा था की क्या बात है आखिर वह हो क्या रहा था? पर उसको मौका नहीं मिल पा रहा था नहीं ही राधिका से बात करने का नहीं श्याम से | आखिर-कार सालगिरह का समारोह समाप्त हुआ जिसमे कि कुछ बहुत ही ख़ास लोग ही शामिल हुए जिसमे कि मोहन और श्याम का परिवार के साथ-साथ राधिका का परिवार और कुछ और नजदीकी लोग थे |समारोह के बाद थक कर मोहन और श्याम छत पर जा कर बैठ गए, अभी वो बैठे ही थे कि किसी ने श्याम को आवाज देकर बुला लिया और वो चला गया, जबकि मोहन वही बैठा रह गया उसको पता था कि जिस लिए भी उसको बुलाया गया है उस काम को कर के श्याम ऊपर ही आएगा | थोड़ी देर के ही बाद राधिका दो कप में चाय लेकर आई और एक कप मोहन को दिया और दूसरा श्याम के लिए वहीँ रख दिया और खुद भी वही बैठ गयी
मोहन  " राधिका एक बात बताओ? "
राधिका  " पूछिये? "
मोहन  " जो मैंने फ़ोन पर सुना वो क्या था? "
राधिका  " क्या मतलब? क्या सुना आपने फ़ोन पर? "
मोहन  " याद करो, कुछ आखिरी प्यार-व्यार की बात हो रही थी "
राधिका  " वो कुछ नहीं था, बस एक मजाक था जो कि आपको सुनाने के लिए किया गया था "
मोहन  " अच्छा ये बात है? "
राधिका  " जी "
मोहन  " फिर श्याम ने क्यों कहा कि आप और वो एक दुसरे से प्यार करते हैं? "
राधिका  " उन्होंने आपको सब बता दिया? "
मोहन  " हाँ, वो मुझसे कुछ नहीं छिपता है "
राधिका  " जब आप सब जानते ही हैं तो मुझसे क्यों पूछ रहे हैं "
मोहन  " बस आपके मुह से सुनना चाहता हूँ, मुझे लगा वो झूठ न बोल रहा हो "
राधिका  " नहीं-नहीं वो झूठ नहीं बोल रहे थे, ये सब सच है, मै आपको पूरी बात बताती हूँ "
उसके बाद राधिका ने मोहन को सारी बात बता दी शुरु के लेकर सुबह तक की
मोहन  " श्याम ने कुछ नहीं बताया था उसको मौका ही नहीं मिला बताने का पर चलो तुमने तो बता दिया, हाँ पहला मौका मिलते ही वो मुझे जरुर बताता "
राधिका  " आप बहुत बदमाश हैं  "
उसके बाद राधिका शर्मा कर भाग गयी, और मोहन वही खड़ा खड़ा हँसता रहा, तभी वहां श्याम वापस आ गया, मोहन ने सोचा कि एक बार इस से भी पूछता हूँ |
मोहन  " तुम लिखते हो ना? "
श्याम  " हाँ थोडा बहुत, क्यों? "
मोहन  " मेरे पास एक कहानी का आईडिया है, तुम उसपर कहानी लिखो "
श्याम  " क्या है कहानी बताइए ? "
मोहन ने फिर राधिका और श्याम की बीच की घटनाओं को कहानी के रूप में सुना दिया, कहानी सुन कर श्याम सोच में पड़ गया,
श्याम  " आपको सब पता चल गया? "
मोहन  " क्या ? "
श्याम  " मतलब आपको कुछ नहीं पता है? "
मोहन  " क्या बात कर रहे हो क्या पता चल गया और क्या नहीं पता है खुल कर बताओ? "

श्याम  " कुछ नहीं " 

अगले भाग में जारी ....

Sunday, May 31, 2015

व्हाट्सएप्प - भाग-8

गतांक से आगे ....

राधिका  " बोला था न मैंने की मै आपको सरप्राइज दूंगी "
ये सुन कर भी श्याम को विश्वास नहीं हुआ वो अभी भी बिना पलकें झपकाए राधिका की तरफ देखता जा रहा था
राधिका  " हेल्लो ! क्या हुआ? मुझे देख कर ख़ुशी नहीं हुई क्या? "
अब तक श्याम थोडा संभल चुका था
श्याम  " हं... क्यों..क्यों नहीं, बहुत ख़ुशी हुई "
राधिका  " बोला था ना की मै आपको सरप्राइज दूंगी "
श्याम  " हाँ बोला तो था "
राधिका  " तो कैसा लगा मेरा सरप्राइज ? "
श्याम  " हं... ब...बहुत अच्छा "
राधिका  " आगे आगे देखिये होता है क्या? "
श्याम  " क्या मतलब? "
राधिका  " कुछ नहीं, चलें? "
श्याम  " हाँ -हाँ चलते हैं "
फिर दोनों स्टेशन के बाहर निकल गए | आज पहली बार श्याम की बाइक के पीछे वाली सीट पर राधिका बैठी थी, और श्याम इस बात पर विश्वास नहीं कर पा रहा था | अचानक एक सुनसान जगह पर राधिका ने बाइक रोकने के लिए कहा, और श्याम कुछ सोचते हुए बाइक को सड़क के किनारे खड़ा कर दिया | राधिका उतर गयी और आने बैग से एक जैकेट निकल कर पहनने  लगी तभी श्याम का मोबाइल बज उठा श्याम ने देखा मोहन का कॉल था, उसने फ़ोन उठाया
श्याम  " हेल्लो ! हाँ भैया बोलिए "
मोहन  " ट्रेन आ गयी या नहीं? "
श्याम  " आ गयी और हम यहाँ से निकल चुके हैं घंटे भर में घर पहुच जायेंगे "
मोहन  " तो कैसा लगा सरप्राइज? "
श्याम  " अच्छा ! तो ये आपकी मिली-भगत से हुआ है, आईडिया किसका था? "
मोहन  " राधिका का, मैंने तो बस अपना पार्ट निभाया है "
राधिका ने तब तक अपना एक कदम श्याम की ओर बढाया और उसके बालों को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा जिस से श्याम आगे की तरफ थोडा झुक गया और उसी समय राधिका ने अपने होंठो को श्याम के होंठों पर रख दिया....
श्याम  " अच्.......... "
श्याम  " ये क्या? “उसने राधिका को धक्का देकर अपने से दूर किया और पूछा
राधिका  " तुम्हारे लिए, अब मै भी तुम्हे अपने दोस्त से ज्यादा मानती हूँ "
मोहन  " श्याम-श्याम क्या हो रहा है ? "
राधिका  " अब ये मत कहना की आपने मुझे अपने दिल से निकाल दिया है "
श्याम  " नहीं-नहीं आप मेरा पहला और आखिरी प्यार हैं "
मोहन  " क्या हो क्या रहा है वहां "
श्याम (मोहन से ) " मै घर पहुच कर बात करता हूँ "
मोहन  " सब ठीक है ना? "
श्याम  " हाँ सब ठीक है मै आकर बात करता हूँ "
और श्याम ने फ़ोन काट दिया
श्याम  " ये क्या था ? "
राधिका  " आपके सवाल का जवाब "
श्याम  " मैंने सवाल कब पूछा? "
राधिका  " उस दिन जिस दिन आपने मैसेज किया था "
श्याम  " उस दिन मैंने कोई सवाल नहीं पूछा था बस अपनी भावनाएं व्यक्त की थीं "
राधिका  " ओके-ओके तो मैंने भी अपनी भावनाएं ही व्यक्त की हैं "
श्याम  " ठीक है, अब चलते हैं वर्ना देर हो जाएगी " 

अगले भाग में जारी ....

Sunday, May 24, 2015

व्हाट्सएप्प - भाग-7

गतांक से आगे ....

राधिका से बात करने के बाद मोहन ने बहुत देर तक सोचा की क्या बहाना बनाये और ये चक्कर क्या है पर मोहन को कुछ समझ नहीं आया | अभी मोहन सोच ही रहा था की उनकी पत्नी ने उनको बताया की उनके कुछ रिश्तेदार आ रहे हैं जिनको लेने के लिए जाना होगा और तभी मोहन के दिमाग में एक बार आई, और उसने श्याम को फ़ोन किया
मोहन  " कब आ रहे हो सालगिरह पर? "
श्याम  " बताया तो था भैया कि सालगिरह वाले दिन से एक दिन पहले शाम को आऊंगा "
मोहन  "  वो तो ठीक है पर एक समस्या है "
श्याम  " क्या? "
मोहन  " हमारा एक रिश्तेदार है जो सालगिरह से एक दिन पहले आ रहा है, उसको लाना है "
श्याम  " कौन आ रहा है? "
मोहन  " तुम्हारी भाभी के भैया "
श्याम  " कब? "
मोहन  " सालगिरह वाले दिन सुबह ४ बजे की गाड़ी से "
श्याम  "  उनको कोई और ट्रेन नहीं मिली क्या? " '
मोहन  " नहीं मिली तभी तो "
श्याम  " ओ तो समस्या ये है की उन्हें लेने के लिए सुबह स्टेशन जाना पड़ेगा? "
मोहन  " हाँ "
श्याम  " ये तो बहुत बड़ी समस्या है "
मोहन  " है तो कोई समाधान है क्या इसका? "
श्याम  " सोचने दीजिये "
मोहन  " ठीक है "
श्याम  " एक समाधान है "
मोहन  " क्या? "
श्याम  " मै रुक कर उनको लेते हुए आऊँ "
मोहन  "  हाँ ये सही है पर तुमको कोई समस्या न हो तो "
श्याम  "  सुबह उठने में दिक्कत तो होगी पर मै कर लूँगा  "
मोहन  " तो ये ठीक रहा की तुम शाम को ना आ कर सुबह उनको लेकर आओगे "
श्याम  " मगर मै उनको पहचानता नहीं हूँ " '
मोहन  "  ट्रेन तो पता ही है मै सीट नंबर और बोगी नंबर बता दूंगा तुम ढूढ लेना और वो तुम्हे पहचानते हैं "
श्याम  " फिर ठीक है मै उन्हें लेता आऊंगा "

उसके बाद मोहन ने राधिका से पूछ कर सारी बातें श्याम को बता दी, पर अभी तक मोहन की समझ में ये नहीं आया था कि ये क्या चल रहा है पर उसने सोचा की जो भी होगा श्याम उसे बता ही देगा आखिर बचपन से उसने कुछ छुपाया नहीं है तो ये क्यों छुपायेगा | उसके बाद मोहन अपने पार्टी की तैयारियों में लग गया | आख़िरकार वो दिन आ ही गया जिस दिन राधिका के द्वारा श्याम को सरप्राइज मिलने वाला था | नियत दिन और समय पर श्याम जब अपने बाइक से रेलवे स्टेशन जा रहा था तो वो थोडा गुस्से में भी था की आखिर क्यों उसने ऐसा कहा की  " मै लेता आऊंगा " | खैर मन ही मन कुढ़ते हुए वो स्टेशन पर पंहुचा और ट्रेन का इंतज़ार करने लगा, जोकि अपने नियत समय से २० मिनट की देरी से चल रही थी | जैसे-तैसे कर के श्याम ने समय काटा और आखिरकार गाड़ी के भी आने का सिग्नल हो गया | ट्रेन के प्लेटफोर्म पर पहुचते ही श्याम दौड़ कर उस बोगी के पास पंहुचा जिसमे राधिका को आना था | वो बेसब्री से इन्तजार करने लगा की कौन है वो जो इस ट्रेन से आ रहा है और जिसको लेकर उसे जाना था | अचानक श्याम के कंधे पर किसी ने हाँथ रखा, और श्याम जैसे ही पीछे मुड़ा, उसके आश्चर्य का ठिकाना ही नहीं रहा, सुबह ४ बजे  रेलवे स्टेशन के प्लेटफोर्म नंबर ३ पर राधिका खड़ी थी, एक बार को तो श्याम ने सोचा की ज्यादा जल्दी उठने और बहुत ज्यादा राधिका के बारे में सोचने के कारण उसे वह इंसान राधिका दिख रही है 

अगले भाग में जारी ....

Sunday, May 17, 2015

व्हाट्सएप्प - भाग-6

गतांक से आगे ....

राधिका  " मतलब आप नहीं जानते? "
श्याम  " नहीं उस परीक्षा का क्या? "
राधिका  " उसका रिजल्ट आ गया, और आप पास भी हो गए हैं, तो बनती है ना मिठाई? "
श्याम  " क्या बात कर रही हैं आप? आपको कैसे पता आपको मेरा रोल नंबर कैसे पता चला कि आपने मेरा रिजल्ट देख लिया? "
राधिका  " आपने जो फर्जी वाला एडमिट कार्ड भेजा था उसपर केवल डेट बदला था जबकि रोल नंबर के साथ सारे डिटेल्स सही थे मैंने उसी की मदद से देखा "
श्याम  " अच्छा! मैं भी देखता हूँ  "
राधिका  " ठीक है, देखिये फिर बताइए की पार्टी कब है? "
श्याम ने तुरंत अपना रिजल्ट देखा और रिप्लाई किया
श्याम  " अभी तो इंटरव्यू बाकी ही है "
राधिका  " जैसे ये हुआ वैसे ही इंटरव्यू भी हो जायेगा, आप बस ये बतईये कब दे रहे हैं पार्टी? "
श्याम  " आपको कब चाहिए? "
राधिका  " जब आप दें "
श्याम  " ठीक है आ जाइये, मै पार्टी दे देता हूँ "
राधिका  " अभी तो नहीं आ सकती पर जब मै आपसे मिलूंगी तब लुंगी पार्टी "
श्याम  " ठीक है "
उसके बाद श्याम जी जान से अपने इंटरव्यू के लिए तैयारी करने लगा | और उसको अपने मेहनत का फल भी मिला, अब वो बैंक के ब्रांच पर सहायक शाखा प्रबंधक के पद पर तैनात हो गया था | नौकरी मिलने के बाद राधिका और श्याम के बीच में दिन को तो बात नहीं हो पाती थी पर रात में दोनों जरुर बात करते थे | धीरे-धीरे कई महीने बीत गए और उधर मोहन की शादी की सालगिरह भी आ गयी | मोहन को ये तो पता था की श्याम की जिंदगी में कोई है पर कौन है उसे ये नहीं पता था | सालगिरह की पार्टी के लिए मोहन ने सबको बुलाया जिसमे उसने अपनी छोटी बहन के पुरे परिवार को भी बुलाया, सब तो आ चुके थे पर अभी तक राधिका का कोई समाचार नहीं था जबकि श्याम सालगिरह की पार्टी के एक दिन पहले आने वाला था | सारी तैयारियां हो चुकी थी जब मोहन ने आखिरी बार राधिका को बुलाने के लिए फ़ोन किया
मोहन  " हेल्लो ! राधिका जी आप कब आ रही हैं यहाँ ? "
राधिका  " भैया मै तो एक ही शर्त पर आउंगी जो आपको मनना पड़ेगा "
मोहन  " पहले शर्त तो बताइए "
राधिका  " शर्त ये है की किसी को पता नहीं चलना चाहिए कि मै आ रही हूँ और श्याम ही मुझे लेने रेलवे स्टेशन आये "
मोहन  " ये कैसी शर्त है? "
राधिका  " उन्होंने मुझे भाभी की शादी की सालगिरह में मुझे सरप्राइज दिया था "
मोहन  " तो उसका यहाँ क्या लेना देना है? "
राधिका  " तो उस समय मैंने उन्हें एक सरप्राइज देने का वादा किया था "
मोहन  " पर मुझे उसे ये तो बताना पड़ेगा न कि आपको रेलवे स्टेशन लेने जाना है उसे? "
राधिका  " कोई बहाना बना दीजिये ये आपके ऊपर है "
मोहन  "  ठीक है देखते हैं पर आप आ रही हैं ना? "
राधिका  " आपको ये शर्त मंजूर है या नही? "
मोहन  " ठीक है "
राधिका  " ठीक है मै आ रही हूँ, और एक बात किसी को भी पता नहीं चलना चाहिए की मै आ रही हूँ "
मोहन  " कब? "
राधिका  " सालगिरह वाले दिन सुबह ४ बजे की गाड़ी से "
मोहन  " ठीक है, मै श्याम से बात करता हूँ "
राधिका  " ठीक है " 

अगले भाग में जारी ....

Sunday, May 10, 2015

व्हाट्सएप्प - भाग-5

गतांक से आगे ....

राधिका इस बात का कोई जवाब न दे सकी क्युकि मन ही मन प्यार तो वो भी करती ही थी पर मानने से मना कर रही थी फिर उसने सोच कर बताने को बोला और फ़ोन रख दिया तीन दिनों तक लगातार उन दोनों की बात न हुई, राधिका का गुस्सा थोडा कम हुआ और उसने सोचा की 'प्यार तो मै भी करती हूँ और श्याम ने तो केवल अपने प्यार का इज़हार किया है न की मुझसे पूछा है तो मतलब की उसको ये नहीं जानना है की मै क्या चाहती हूँ, पर उसने अपने दिल की बात बताई है, तो अगर मै चाहूँ तो बिना कोई उत्तर दिए इस दोस्ती को बरक़रार रख सकती हूँ, हाँ यही करुँगी |' उधर लगातार तीन दिनों से बात न होने के कारण श्याम की हालत ख़राब थी वो पढना-लिखना खाना पीना छोड़ कर शांत बैठा रहता था उसके दोस्त भी परेशान थे की इससे क्या हो गया है पर वो किसी को कुछ बताता ही नहीं था, तीसरे दिन दोपहर को अचानक मोबाइल बजा, राधिका उसको मैसेज तो करेगी नहीं, किसी और का मैसेज होगा ये सोच कर उसने ध्यान नहीं दिया पर थोड़ी देर बाद ही एक और मैसेज आया उसने फिर से ध्यान नहीं दिया फिर जब तीसरा मैसेज आया तो उसने अनमने भाव से मोबाइल उठाया, जैस एही उसने मैसेज देखा ख़ुशी और हैरानी से उछल ही पड़ा, सबसे पहले तो उसे ख़ुशी हुई कि राधिका ने आखिर तीन दिनों के बाद उसको मैसेज किया पर हैरानी हुई जब उसने राधिका का भेजा मैसेज पढ़ा 
राधिका  " मिठाई नहीं खिलाईयेगा क्या? "
राधिका  " बधाई हो "
राधिका  " बताया भी नहीं "
श्याम  " किस बात की मिठाई? आपके नाराज होने की? और क्या नहीं बताया ? "
राधिका  " चलिए बनिए मत ये बताइए की आप पार्टी कब दे रहे हैं? "
श्याम  " किस बात की पार्टी ये सब क्या हो रहा है, एक तो आप मुझे तीन दिनों के बाद मैसेज की और दुसरे मुझे इन अजीब सवालों से हैरान कर रहीं हैं  "
राधिका  " बात ही कुछ ऐसी है और वो बात भूल कर हम आगे बढ़ें तो अच्छा होगा "
श्याम  " ठीक है पर ये तो बताइए ये सब क्या है ? "
राधिका  " आपको सच्ची नहीं पता ? "
श्याम  " नहीं "
राधिका  " चलिए एक हिंट देती हूँ "
श्याम  " ठीक है "
राधिका  " आपने जो परीक्षा दिया था सालगिरह से एक दिन पहले ! "
श्याम  " हाँ दिया तो था पर उसका क्या "


श्याम को राधिका के मैसेज मिलने की ख़ुशी में ये याद ही नहीं रहा उसके उस परीक्षा का भी रिजल्ट आज सुबह आ गया था, पर उसने ये सोचकर कि मेरी तकदीर ही ख़राब है पास ही नहीं हुआ होऊंगा रिजल्ट ही नहीं देखा था,

अगले भाग में जारी ....

Sunday, May 3, 2015

व्हाट्सएप्प - भाग-4

गतांक से आगे ....

राधिका ये पढ़ कर हैरान रह गयी, पता नहीं क्यों उसको उम्मीद ना थी की उसको इतनी जल्दी ये सुनने को मिलेगा हांलाकि वो ये जानती जरुर थी कि ऐसा ही कुछ है, और आज नहीं तो कल ऐसा जरुर होगा | कहीं न कहीं ये बात  वो सुनना भी चाहती थी और बोलना भी पर वो पहल कैसे करती वो एक लड़की थी और वो श्याम के पहल करने का इंतज़ार कर रही थी और अब जबकि श्याम को जो बोलना चाहिए था बोल चुका था तो वो विश्वास नहीं कर पा रही थी और साथ ही साथ उसे श्याम पर गुस्सा आ रहा था कि इतना लेट क्यों बोला और धीरे-धीरे गुस्सा प्यार पर हावी होता गया और बिना कोई रिप्लाई किये वो ऑफ लाइन हो गयी | इधर श्याम की हालत ख़राब हो रही थी क्युकि वो समझ नहीं पा रहा था की उसने जो किया वो सही था या गलत था, जैसे-जैसे सोचता वैसे-वैसे उसको ये बात गलत लगती और और वो अपने आप को धिक्कारने लगा था कि उसने ऐसा क्यों किया, उसे ऐसा नहीं बोलना चाहिए था | अब उसे डर भी लगने लगा था, कहीं राधिका इस बात का बुरा न मान जाए और घर वालों से ना बात कर ले, हांलाकि उसे घर वालो के पता चलने का उतना डर नहीं था जितना कि राधिका के गुस्सा होने का | श्याम लगातार राधिका को मैसेज पर मैसेज किये जा रहा था पर राधिका तो ऑफ लाइन हो चुकी थी, कोई जवाब न पा कर श्याम ने राधिका को फ़ोन किया उसने फ़ोन नहीं उठाया, लगातार कई बार करने पर आखिर राधिका ने फ़ोन उठाया

राधिका गुस्से से  " क्या है? क्यों परेशान कर रहे हैं? "
श्याम  " सॉरी "
राधिका  " किसलिए? "
श्याम  " व्हाट्स एप्प के लिए जो बोला था उसके लिए "
राधिका  " मै आपको ऐसा नहीं समझती थी  "
श्याम  " ये मेरी भावनाएं थी अगर मै इनको व्यक्त नहीं करता तो बर्बाद हो जाता मै "
राधिका  " मतलब अगर आप मुझे नहीं बताते तो बर्बाद हो जाते? "
श्याम  " हां "
राधिका  " वो कैसे? "
श्याम  " बस हो जाता, आगे आपकी मर्जी कोई दबाव नहीं है आप पर "
राधिका  " वो तो आप वैसे भी नहीं डाल पायेंगे "
श्याम  " मेरे कहने का मतलब है कि, आप चाहें तो दोस्ती रख सकतीं हैं या ख़त्म कर सकतीं हैं  "
राधिका  " इतना होने के बाद आपको लगता है कि पहले जैसे दोस्ती हो पायेगी? "
श्याम  " मुझे नहीं पता, पर इतना मुझे पता है की मै आपको कभी अपना दोस्त नहीं मान पाउँगा "
राधिका  " क्यों? "
श्याम  " क्युकि आप मेरे लिए एक दोस्त से बढ़ कर बन गयीं हैं "
राधिका  " क्या बन गयी हूँ मै? जरा ये भी तो जानू मैं "
श्याम  " आपको अब पता है की आप मेरे लिए क्या हैं? आगे आपकी मर्जी मै फ़ोन रख रहा हूँ "
राधिका  " सुनिए तो "
श्याम  " बोलिए "
राधिका  " क्या आपको लगता है कि ये जानने के बाद मै पहले जैसा सोच सकूंगी ? "
श्याम  " मतलब ? "
राधिका  " मतलब कि पहले कभी ऐसा नहीं सोचा था मैंने, और आपको हमेशा अपना अच्छा दोस्त ही माना था क्योकि मुझे लगता था की आप मुझे अपना दोस्त मानते हैं  "
श्याम  " तो? "
राधिका  " तो ये कि अब आप तो मुझे अपना दोस्त मानते ही नहीं हैं और ये चाहते हैं की मैं आपको अभी भी वही पुराना वाला दोस्त मानूं "
श्याम  " हां मैं आपको अब अपना दोस्त नहीं मानता हूँ पर दोस्त से बढ़कर मानता हूँ " 

अगले भाग में जारी ....