Sunday, June 21, 2015

व्हाट्सएप्प - भाग-11

गतांक से आगे ....

राधिका  " क्या ये आप हैं? "
श्याम  " हाँ हूँ तो मै ही जब मुझे मैसेज किया है तो मै ही होऊंगा ना "
राधिका  " नहीं-नहीं आप मेरी सगाई में आयें हैं क्या? "
श्याम  " हाँ आया तो हूँ, मुझे भी बुलाया गया है "
राधिका  " और आप मेरी बरबादी देखने के लिए आ गए? "
श्याम  " बरबादी कहाँ आप तो आज आबाद हो रही हैं "
राधिका  " ये मजाक का समय नहीं है, सच बताइए क्या हो रहा है ये सब "
श्याम  " आपकी सगाई होने वाली है अभी थोड़ी देर में और आपके घर वाले और लड़के के घर वाले मिल कर शादी का दिन तय कर रहे हैं अभी तो "
राधिका  " फिर मजाक? मैंने पूछा आप यहाँ क्या कर रहे हैं? "
श्याम  " क्या चाहती हैं आप की मै न रहूँ यहाँ? चला जाऊ? "
रधिका  " अगर आपको मुझे रोते हुए देखने का शौक है तो रुकिए वरना चले जाइये मै आपका चेहरा भी नहीं देखना चाहती हूँ "
श्याम  " अगर मै चला गया तो समस्या हो जाएगी "
राधिका  " कैसी समस्या? "
श्याम  " आज तक तो मैंने नहीं देखा है की बिना लड़के के ही सगाई हो जाये "
राधिका  " मतलब ? "
श्याम  " मतलब ये मेरी जान, कि मै ही हूँ आपका होने वाला पति, तो कैसा लगा ये सरप्राइज "
राधिका  " अगर ये सच है तो फिर आप नहीं बचेंगे, और अगर झूठ है तो भी आप नहीं बचेंगे  "
सालगिरह के कुछ ही दिनों के बाद राधिका ने अपनी भाभी को ये बात बता दी और उसकी भाभी ने श्याम को फ़ोन किया और सच को जाना, इसके बाद उन्होंने श्याम से पूछा की करना क्या है, और श्याम ने अपना प्लान बताया की क्या, कब और कैसे करना है, शादी कोई छोटा सा काम नहीं है कि कुछ अपरिपक्व लोग मिल कर फैसला कर सकें, इस काम को करने के लिए सबको राजी होना जरुरी होता है क्युकि ये केवल दो लोगो का ही नहीं बल्कि दो परिवारों का मिलन समारोह होता है, केवल शादी से ही दो अलग-अलग परिवार मिलकर एक हो जाते हैं न केवल एक पीढ़ी बल्कि अगली कई पीढ़ियों का रिश्ता हो जाता है ये, इसलिए राधिका और श्याम ने ये फैसला किया था की अगर घर वाले माने तब ही वो दोनों शादी करेंगे वरना नहीं | खैर मोहन ने श्याम के पिताजी से और राधिका की भाभी ने राधिका के पिताजी से बात की और दोनों ने मिल कर किसी तरह उनको मना लिया एक बार को बात कुंडली पर आ कर रुकी पर किसी तरह उसको भी संभल लिया गया जिसमे की पंडित ने ये बताया कि कोई पूजा है जो विवाह से पहले संपन्न करना होगा बाकी सब ठीक था | उधर राधिका की भाभी ने राधिका को नहीं बताया कि उसके पिता जी इस शादी के लिए मान गए हैं और किसी तरह अपने ससुर और सास को भी मना लिया कि जब तक सगाई का दिन नहीं आता तब तक राधिका को भी ये बात ना बताई जाये | जबसे राधिका को पता चला था कि उसकी शादी श्याम से नहीं हो किसी और से हो रही है तब से वो अकेले में चुहुप छुप कर रोती थी, उधर श्याम ये राधिका की ये हालत देख देख कर परेशान रहता था | पर इन सब के बीच में वो बस यही सोचा करता था कि जब राधिका को सच्चाई का पता चलेगा तो उसके चेहरे पर जो शर्म की लाली फैलेगी वही इस नाटक का फल होगा, और आज वो राधिका को इतना खुश देख कर, खुश था कि उसने सरप्राइज ये फैसला लिया, हांलाकि वो ये जानता था कि अब उसे राधिका के वो प्यार भरे झगड़े उसे जिंदगी भर खुश रखेंगे |



-: समाप्त :-

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