Friday, May 15, 2015

भाग्य

विवाह के बीस सालों के बाद अब जाकर चौधरी साहब को पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई थी| चौधरी और चौधराईन की ख़ुशी का पारावार ही ना रहा जब उन्हें पता चला कि उनके भी घर एक बच्चे की किलकारी गूजेंगी| १५ की छोटी उम्र में विवाह कर के लाये थे चौधरी और तबसे अब तक उन्हें किसी भी औलाद की प्राप्ति नहीं हुई थी, चौधराईन ने तो घर से निकलना भी बंद कर दिया था, जब भी घर से निकलतीं तो कोई ना कोई उन्हें बाँझ होने का ताना दे ही देता| इस ताने से छुटकारा पाने के लिए चौधराईन ने जहाँ-जहाँ ऊँचा स्थान देखा वहां-वहां अपना माथा टेका था, आखिर अब जा कर बीस सालों के बाद उनकी मनोकामना पूरी हुई थी| चौधरी आज भी उस समाज के मुखिया थे जहाँ लड़के को ही सबकुछ माना जाता था, लड़की होना तो जैसे पाप था, और ऐसे समाज में बीस सालों के बाद एक पुत्र पिता बनना बहुत बड़ी बात थी | जिस दिन से लड़का पैदा हुआ था उस दिन से चौधरी अपनी मूंझों पर ताव देते हुए सीना फुलाकर पुरे गाँव में घूमा करते थे अब किसी की हिम्मत नहीं थी की कोई उन्हें या उनकी चौधराईन को कुछ कह देता|

एक दिन सुबह के वक्त चौधरी जी दरवाजे पर अपनी खाट पर बैठे मन ही मन खुश हो रहे थे कि कहीं से घूमता फिरता एक साधू आया और दरवाजे पर खड़ा होकर भिक्षा के लिए आवाज लगाने लगा, चौधराईन अपने बच्चे को संभाले हुए घर से बाहर निकलीं ...
"महाराज हमारे बच्चे का भविष्य तो बताइये ? " चौधराईन बोलीं
"बच्चा भविष्य तो ऊपर वाले के हाँथ में है फिर भी मैं तो इसका भाग्य ही बता सकता हूँ " साधू बोला
" महाराज पहले यहाँ विराजमान होइए फिर बताइये ?" चौधरी साहब बोले
साधू आगे बढ़कर चौधरी की खाट पर बैठ गया और चौधरी जी खाट से उतर कर उसके पैरों में नीचे बैठ गए,
"बेटा, लाओ बच्चा हमारे हांथों में दो और तुम भी बैठ जाओ " साधू चौधराईन को बोला
चौधराईन ने बच्चे को साधू के हांथों में दिया और वो भी अपने पति के बगल में बैठ गयीं, साधू ने पहले बच्चे के दोनों हांथो को देखा फिर उसका माथा देखा और फिर उसको उल्टा कर के देखा और फिर बोला
" बेटा तुम्हारा बच्चा तो पूर्व जन्म का कोई महर्षि या योगी है, जरुर तुमने कोई बहुत बड़ा पुण्य का काम किया होगा तभी इसने तुम्हारे घर जन्म लिया है, और ये निशान देख रहे हो " साधू ने बच्चे की गर्दन के निचले हिस्से पर बने को दिखा कर बोला
" इस निशान की वजह से मै ये साफ़-साफ़ बता सकता हूँ कि इसके भाग्य में राजयोग है ये आगे चलकर बहुत बड़ा काम करेगा, यह लोगों पर राज करेगा " साधू ने इतना कह कर बच्चा चौधराईन को वापस कर दिया
"अरे ! महाराज को कुछ भोग तो लगाओ, और कुछ दान-दक्षिणा भी दो " चौधरी जी ने खुश होकर चौधराईन से कहा
"क्यों नहीं मैं तो बाबा पर अपना पूरा धन न्योछावर कर दूँ " चौधराईन बोली और उठकर अन्दर चलीं गयीं थोड़ी ही देर में खाने-पीने का सामान लेकर वापस आयीं और साधू को दे दिया
साधू ने जमकर भोग लगाया और तृप्त होकर बोला "बेटा अब हमें जाने दो " पर
चौधराईन बोलीं "अरे महाराज अपनी दक्षिणा तो लेते जाइये "
और उन्होंने अपने हांथों में पहने सोने के भरवां कंगन उतार कर साधू को दे दिया| चौधरी उस समय तो कुछ नहीं बोले पर साधू के जाने के बाद उन्होंने चौधराईन से पूछा
"तुम्हे अपने कंगन इतने प्यारे थे कि कभी उतारती भी नहीं थी अचानक तुम्हे क्या हुआ की उठाकर कंगन ही दे दिया? अरे जब मैंने बोला था कि कुछ दक्षिणा दे दो तो इसका मतलब ये थोड़े ही था, वैसे भी अब हमारे पास ये कंगन ही तो बचे थे इसके अलावा कुछ भी तो नहीं है हमारे पास, हाँ बस दिखावा रह गया है "
चौधराईन थोडा मुस्कुराते हुए बोलीं " अरे जब बेटा बड़ा होकर कमाएगा तो ऐसे कितने ही कंगन बनवा देगा, और मेरी तो कोई बेटी भी नहीं है की उसे देने के लिए मै सहेज कर रखती, इतना अच्छा भविष्य बताया हमारे लड़के का महाराज ने, बिना कुछ दिए विदा कर देती क्या" और सर झटक कर अन्दर चलीं गयी


उसी शाम को जब चौधरी पुरे गाँव में घूम कर सबको अपने बेटे का भविष्य बता कर आये ही थे की एक भिखारी कहीं से भीख माँगता हुआ उनके दरवाजे पर पहुंचा, भिखारी ने जोर से आवाज लगाई "माई इस गरीब को कुछ खाने को दे दो तो बड़ा पुण्य होगा " चौधराईन जब उस भिखारी की आवाज सुनकर एक कटोरे में थोड़े चावल ले कर बाहर आयीं और उस भिखारी को दे दीं, भिखारी अपनी भिक्षा पा कर उन्हें दुआ देता हुआ मुड़ कर अपने रास्ते जाने लगा की चौधराईन चीख मार कर चौखट पर गिर पड़ीं और बेहोश हो गयीं, चौधरी का मुँह खुला का खुला रह गया जब उन्होंने भिखारी की गर्दन के निचले हिस्से पर बने उस निशान को देखा, जो हुबहू उनके बच्चे के निशान का प्रतिरूप लग रहा था, भाग्य और भविष्य तो एक भिखारी का भी होता है |

Sunday, May 10, 2015

व्हाट्सएप्प - भाग-5

गतांक से आगे ....

राधिका इस बात का कोई जवाब न दे सकी क्युकि मन ही मन प्यार तो वो भी करती ही थी पर मानने से मना कर रही थी फिर उसने सोच कर बताने को बोला और फ़ोन रख दिया तीन दिनों तक लगातार उन दोनों की बात न हुई, राधिका का गुस्सा थोडा कम हुआ और उसने सोचा की 'प्यार तो मै भी करती हूँ और श्याम ने तो केवल अपने प्यार का इज़हार किया है न की मुझसे पूछा है तो मतलब की उसको ये नहीं जानना है की मै क्या चाहती हूँ, पर उसने अपने दिल की बात बताई है, तो अगर मै चाहूँ तो बिना कोई उत्तर दिए इस दोस्ती को बरक़रार रख सकती हूँ, हाँ यही करुँगी |' उधर लगातार तीन दिनों से बात न होने के कारण श्याम की हालत ख़राब थी वो पढना-लिखना खाना पीना छोड़ कर शांत बैठा रहता था उसके दोस्त भी परेशान थे की इससे क्या हो गया है पर वो किसी को कुछ बताता ही नहीं था, तीसरे दिन दोपहर को अचानक मोबाइल बजा, राधिका उसको मैसेज तो करेगी नहीं, किसी और का मैसेज होगा ये सोच कर उसने ध्यान नहीं दिया पर थोड़ी देर बाद ही एक और मैसेज आया उसने फिर से ध्यान नहीं दिया फिर जब तीसरा मैसेज आया तो उसने अनमने भाव से मोबाइल उठाया, जैस एही उसने मैसेज देखा ख़ुशी और हैरानी से उछल ही पड़ा, सबसे पहले तो उसे ख़ुशी हुई कि राधिका ने आखिर तीन दिनों के बाद उसको मैसेज किया पर हैरानी हुई जब उसने राधिका का भेजा मैसेज पढ़ा 
राधिका  " मिठाई नहीं खिलाईयेगा क्या? "
राधिका  " बधाई हो "
राधिका  " बताया भी नहीं "
श्याम  " किस बात की मिठाई? आपके नाराज होने की? और क्या नहीं बताया ? "
राधिका  " चलिए बनिए मत ये बताइए की आप पार्टी कब दे रहे हैं? "
श्याम  " किस बात की पार्टी ये सब क्या हो रहा है, एक तो आप मुझे तीन दिनों के बाद मैसेज की और दुसरे मुझे इन अजीब सवालों से हैरान कर रहीं हैं  "
राधिका  " बात ही कुछ ऐसी है और वो बात भूल कर हम आगे बढ़ें तो अच्छा होगा "
श्याम  " ठीक है पर ये तो बताइए ये सब क्या है ? "
राधिका  " आपको सच्ची नहीं पता ? "
श्याम  " नहीं "
राधिका  " चलिए एक हिंट देती हूँ "
श्याम  " ठीक है "
राधिका  " आपने जो परीक्षा दिया था सालगिरह से एक दिन पहले ! "
श्याम  " हाँ दिया तो था पर उसका क्या "


श्याम को राधिका के मैसेज मिलने की ख़ुशी में ये याद ही नहीं रहा उसके उस परीक्षा का भी रिजल्ट आज सुबह आ गया था, पर उसने ये सोचकर कि मेरी तकदीर ही ख़राब है पास ही नहीं हुआ होऊंगा रिजल्ट ही नहीं देखा था,

अगले भाग में जारी ....

Sunday, May 3, 2015

व्हाट्सएप्प - भाग-4

गतांक से आगे ....

राधिका ये पढ़ कर हैरान रह गयी, पता नहीं क्यों उसको उम्मीद ना थी की उसको इतनी जल्दी ये सुनने को मिलेगा हांलाकि वो ये जानती जरुर थी कि ऐसा ही कुछ है, और आज नहीं तो कल ऐसा जरुर होगा | कहीं न कहीं ये बात  वो सुनना भी चाहती थी और बोलना भी पर वो पहल कैसे करती वो एक लड़की थी और वो श्याम के पहल करने का इंतज़ार कर रही थी और अब जबकि श्याम को जो बोलना चाहिए था बोल चुका था तो वो विश्वास नहीं कर पा रही थी और साथ ही साथ उसे श्याम पर गुस्सा आ रहा था कि इतना लेट क्यों बोला और धीरे-धीरे गुस्सा प्यार पर हावी होता गया और बिना कोई रिप्लाई किये वो ऑफ लाइन हो गयी | इधर श्याम की हालत ख़राब हो रही थी क्युकि वो समझ नहीं पा रहा था की उसने जो किया वो सही था या गलत था, जैसे-जैसे सोचता वैसे-वैसे उसको ये बात गलत लगती और और वो अपने आप को धिक्कारने लगा था कि उसने ऐसा क्यों किया, उसे ऐसा नहीं बोलना चाहिए था | अब उसे डर भी लगने लगा था, कहीं राधिका इस बात का बुरा न मान जाए और घर वालों से ना बात कर ले, हांलाकि उसे घर वालो के पता चलने का उतना डर नहीं था जितना कि राधिका के गुस्सा होने का | श्याम लगातार राधिका को मैसेज पर मैसेज किये जा रहा था पर राधिका तो ऑफ लाइन हो चुकी थी, कोई जवाब न पा कर श्याम ने राधिका को फ़ोन किया उसने फ़ोन नहीं उठाया, लगातार कई बार करने पर आखिर राधिका ने फ़ोन उठाया

राधिका गुस्से से  " क्या है? क्यों परेशान कर रहे हैं? "
श्याम  " सॉरी "
राधिका  " किसलिए? "
श्याम  " व्हाट्स एप्प के लिए जो बोला था उसके लिए "
राधिका  " मै आपको ऐसा नहीं समझती थी  "
श्याम  " ये मेरी भावनाएं थी अगर मै इनको व्यक्त नहीं करता तो बर्बाद हो जाता मै "
राधिका  " मतलब अगर आप मुझे नहीं बताते तो बर्बाद हो जाते? "
श्याम  " हां "
राधिका  " वो कैसे? "
श्याम  " बस हो जाता, आगे आपकी मर्जी कोई दबाव नहीं है आप पर "
राधिका  " वो तो आप वैसे भी नहीं डाल पायेंगे "
श्याम  " मेरे कहने का मतलब है कि, आप चाहें तो दोस्ती रख सकतीं हैं या ख़त्म कर सकतीं हैं  "
राधिका  " इतना होने के बाद आपको लगता है कि पहले जैसे दोस्ती हो पायेगी? "
श्याम  " मुझे नहीं पता, पर इतना मुझे पता है की मै आपको कभी अपना दोस्त नहीं मान पाउँगा "
राधिका  " क्यों? "
श्याम  " क्युकि आप मेरे लिए एक दोस्त से बढ़ कर बन गयीं हैं "
राधिका  " क्या बन गयी हूँ मै? जरा ये भी तो जानू मैं "
श्याम  " आपको अब पता है की आप मेरे लिए क्या हैं? आगे आपकी मर्जी मै फ़ोन रख रहा हूँ "
राधिका  " सुनिए तो "
श्याम  " बोलिए "
राधिका  " क्या आपको लगता है कि ये जानने के बाद मै पहले जैसा सोच सकूंगी ? "
श्याम  " मतलब ? "
राधिका  " मतलब कि पहले कभी ऐसा नहीं सोचा था मैंने, और आपको हमेशा अपना अच्छा दोस्त ही माना था क्योकि मुझे लगता था की आप मुझे अपना दोस्त मानते हैं  "
श्याम  " तो? "
राधिका  " तो ये कि अब आप तो मुझे अपना दोस्त मानते ही नहीं हैं और ये चाहते हैं की मैं आपको अभी भी वही पुराना वाला दोस्त मानूं "
श्याम  " हां मैं आपको अब अपना दोस्त नहीं मानता हूँ पर दोस्त से बढ़कर मानता हूँ " 

अगले भाग में जारी ....